
वृंदावन, 6 अक्टूबर 2026। संत प्रेमानंद महाराज के श्रीराधा केलिकुंज आश्रम को लेकर विवाद लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। उनके शिष्य रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत और आश्रम से जुड़े कुछ लोगों के लापता होने के मामलों के बीच अब संत की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा गया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने प्रेमानंद महाराज को Z+ सुरक्षा देने की मांग की है। पत्र में आश्रम से जुड़े कई गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
शिष्य की मौत के बाद आश्रम को लेकर बढ़ी चर्चा
प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद से ही श्रीराधा केलिकुंज आश्रम चर्चा में है। रिपोर्टों के अनुसार, शिष्य की मौत आश्रम के आसपास एक इमारत से गिरने के बाद हुई थी। मामले की परिस्थितियों को लेकर पुलिस जांच कर रही है और सामने आए वीडियो तथा अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है। इस बीच मौत को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने से मामले ने तूल पकड़ा है।
इसी घटनाक्रम के बाद आश्रम में कथित गुटबाजी को लेकर भी दावे किए जा रहे हैं। दिनेश फलाहारी ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में आरोप लगाया कि आश्रम से जुड़े कुछ लोगों के संबंध आपराधिक तत्वों और कथित भूमाफिया से हो सकते हैं। उन्होंने यमुना खादर क्षेत्र में जमीन से जुड़े मामलों की जांच और आश्रम के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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लापता बच्चों और सेवादारों के पुलिस सत्यापन की मांग
पत्र में आश्रम में आने वाले कुछ बच्चों को लेकर भी गंभीर आशंकाएं जताई गई हैं। आरोप लगाया गया है कि कुछ बच्चे धार्मिक गतिविधियों के दौरान आश्रम में रुक जाते हैं और बाद में उनके परिजन उन्हें तलाशते हुए वहां पहुंचते हैं। इसी आधार पर बाल आयोग से जांच कराने की मांग की गई है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में प्रेमानंद महाराज से जुड़े दो किशोरों के लापता होने के मामले चर्चा में रहे। इनमें से एक किशोर प्रयागराज में और दूसरा बरसाना के एक आश्रम में मिला। दोनों के मिलने के बाद परिवारों को राहत मिली, लेकिन उनके आश्रम से अलग-अलग स्थानों तक पहुंचने की परिस्थितियों को लेकर पुलिस की जांच महत्वपूर्ण बनी हुई है।
फलाहारी महाराज ने आश्रम में रहने वाले सेवादारों का पुलिस सत्यापन कराने की भी मांग की है। पत्र में कथित बाल तस्करी और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े आरोपों का उल्लेख करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। हालांकि, इन आरोपों को अभी जांच से साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।
सरकार के अगले कदम पर नजर
संत प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा बढ़ाने को लेकर पिछले कुछ दिनों में मुख्यमंत्री को एक से अधिक पत्र भेजे जाने की खबरें सामने आई हैं। कुछ संतों ने भी उनकी सुरक्षा के लिए सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार प्रेमानंद महाराज को Z+ सुरक्षा देने पर क्या निर्णय लेती है। वहीं आश्रम से जुड़े आरोपों पर प्रशासनिक या जांच एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट सामने आना भी बाकी है। ऐसे में मामले में लगाए जा रहे आरोपों और स्थापित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि पत्र में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
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