
भोपाल में गुरुवार 8 अक्टूबर को कई व्यापारियों ने ‘नो यूपीआई डे’ मनाकर डिजिटल पेमेंट पर प्रस्तावित MDR चार्ज का विरोध किया। किराना, चावल और दाल कारोबार से जुड़े व्यापारियों ने कई बाजारों में QR कोड के जरिए भुगतान स्वीकार नहीं किया। व्यापारियों का कहना है कि अतिरिक्त शुल्क से कम मार्जिन वाले कारोबार पर सीधा असर पड़ेगा। मांग नहीं मानी गई तो 16 अक्टूबर से विरोध और बढ़ाने की चेतावनी दी गई है।
QR कोड से भुगतान लेने से व्यापारियों ने किया इनकार
भोपाल किराना व्यापारी महासंघ और चावल-दाल व्यापारी संघ से जुड़े कारोबारियों ने 8 अक्टूबर को सांकेतिक विरोध किया। हनुमानगंज-जुमेराती समेत कई बाजारों में व्यापारियों से UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने की अपील की गई थी।
व्यापारियों का कहना है कि UPI आज छोटे-बड़े कारोबार के लिए भुगतान का आसान माध्यम बन चुका है। इसके बावजूद प्रस्तावित MDR चार्ज लागू होने से व्यापारियों की लागत बढ़ेगी। उनका तर्क है कि कम मुनाफे पर चलने वाले कारोबार में अतिरिक्त शुल्क का असर ज्यादा होगा।
0.4 फीसदी MDR को लेकर क्यों है नाराजगी?
व्यापारी संगठनों के मुताबिक प्रस्तावित व्यवस्था में पात्र मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.4 फीसदी MDR लागू होने की बात है। व्यापारियों का कहना है कि किराना और अन्य कारोबार में औसत मार्जिन पहले से सीमित है। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क उनकी कमाई को प्रभावित कर सकता है।
भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू के मुताबिक व्यापारियों का औसत मुनाफा करीब 1 फीसदी बताया जाता है। उनका कहना है कि इसमें 0.4 फीसदी शुल्क जाने पर कारोबार का बचा हुआ मार्जिन और कम हो जाएगा।
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व्यापारी UPI के खिलाफ नहीं, शुल्क का कर रहे विरोध
व्यापारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि उनका विरोध UPI या डिजिटल पेमेंट व्यवस्था के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि व्यापारियों ने पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल भुगतान को तेजी से अपनाया है और ग्राहकों के लिए भी इससे भुगतान आसान हुआ है।
व्यापारियों की मांग है कि सरकार प्रस्तावित MDR व्यवस्था पर दोबारा विचार करे और छोटे व मध्यम कारोबारियों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखे। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाले कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।
16 अक्टूबर से बढ़ सकता है विरोध
8 अक्टूबर का ‘नो यूपीआई डे’ व्यापारियों की ओर से सांकेतिक विरोध के तौर पर रखा गया था। भोपाल किराना व्यापारी महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो 16 अक्टूबर से UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने का फैसला लिया जा सकता है।
व्यापारी संगठनों का कहना है कि आगे की रणनीति संबंधित व्यापारिक संगठनों और वाणिज्य मंडल से चर्चा के बाद तय की जाएगी। फिलहाल उनका जोर सरकार तक अपनी मांग शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचाने पर है। भोपाल में ‘नो यूपीआई डे’ के जरिए व्यापारियों ने प्रस्तावित MDR चार्ज के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की है। व्यापारी UPI बंद करने के बजाय शुल्क व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं। अब नजर सरकार के अगले कदम और 16 अक्टूबर को व्यापारिक संगठनों की प्रस्तावित रणनीति पर है।
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