
बड़े जिले में तैनात एसपी साहब अब तक अपने अधीनस्थों की वसूली के मामले में सख्त हिदायत देते रहे हैं। मातहतों को साफ संदेश था कि किसी पुलिसकर्मी की वसूली की शिकायत मिली तो उसे नहीं बख्शेंगे। लेकिन अब साहब की अपनी कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि जिले के कई बड़े कारोबारियों से कथित मासिक बंदी लेकर उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि जिले में एक ठेकेदार खुलेआम अहाते संचालित कर रहा है। जब भी कोई पुलिसकर्मी वहां बैठे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंचता है, तो कुछ ही देर में साहब के करीबी पुलिसकर्मी का फोन आ जाता है। संदेश साफ होता है—कार्रवाई छोड़ो और वापस लौट जाओ।
ऊपर से आने वाले इस कथित फरमान के आगे मैदान में कार्रवाई करने पहुंचे पुलिसकर्मी भी बेबस नजर आते हैं। आरोपों के मुताबिक, जिस ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, उसके मामले में पुलिसकर्मियों को पीछे हटना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब एसपी साहब अपने अधीनस्थों को वसूली के मामले में सख्त रहने की हिदायत देते हैं, तो फिर उनके ही जिले में इस तरह की शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं। पुलिसकर्मियों को यह संदेश दिया जाता रहा है कि किसी की वसूली की शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी, लेकिन अब साहब की अपनी कार्यशैली को लेकर ही चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
बताया जा रहा है कि ठेकेदार के अहातों को लेकर कार्रवाई करने पहुंचने वाले पुलिसकर्मियों को कथित तौर पर फोन के जरिए रोक दिया जाता है। इस वजह से कार्रवाई की तैयारी करने वाले पुलिसकर्मियों के कदम बीच रास्ते में ही रुक जाते हैं। अब सवाल यह है कि जिस वसूली के खिलाफ साहब खुद सख्ती की बात करते रहे हैं, उसी तरह के आरोपों पर उनकी नजर कब पड़ेगी। फिलहाल यह मामला पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि तस्वीर में उपलब्ध सामग्री से नहीं होती है।
- sp-monthly-collection-contractor-allegations








