
अमेरिका में परिवार और बच्चों को लेकर एक दिलचस्प आर्थिक ट्रेंड सामने आया है। जहां पहले अमीर परिवारों में कम बच्चे होने का चलन देखा जाता था, वहीं अब देश के सबसे धनवान परिवारों में तीन या उससे ज्यादा बच्चों का होना अधिक आम दिखाई दे रहा है। हालिया विश्लेषण के मुताबिक, अमेरिका के सबसे अमीर 1 प्रतिशत परिवारों में करीब 49 प्रतिशत के तीन या उससे अधिक बच्चे हैं। वहीं, अन्य आय वर्गों के अधिकांश परिवारों में यह आंकड़ा लगभग 40 से 43 प्रतिशत के बीच है। इस बदलाव ने एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या आज के अमेरिका में बड़ा परिवार भी संपन्नता और आर्थिक ताकत का प्रतीक बनता जा रहा है।
इस ट्रेंड के पीछे सबसे बड़ा कारण बच्चों की परवरिश पर होने वाला भारी खर्च माना जा रहा है। अमेरिका में बच्चों की देखभाल, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, आवास और रोजमर्रा की जरूरतें काफी महंगी हैं। औसत परिवार के लिए तीसरे बच्चे की जिम्मेदारी उठाना आर्थिक रूप से मुश्किल हो सकता है, खासकर तब जब माता-पिता दोनों नौकरी करते हों और बच्चों की देखभाल के लिए अलग से खर्च करना पड़ता हो। वहीं, बेहद अमीर परिवारों के पास पर्याप्त आय और संसाधन होने के कारण वे बच्चों की देखभाल के लिए अतिरिक्त मदद, महंगी सुविधाएं और बेहतर शिक्षा का इंतजाम कर सकते हैं। इसी वजह से तीन या उससे अधिक बच्चों वाला परिवार अब कई मामलों में आर्थिक विशेषाधिकार से जुड़ा दिखाई दे रहा है।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बच्चों की संख्या के आधार पर किसी परिवार की संपन्नता तय नहीं की जा सकती। कुछ विश्लेषकों ने यह भी कहा है कि सर्वेक्षण में पुनर्विवाह और सौतेले बच्चों की संख्या जैसे पहलुओं का असर हो सकता है। एक सर्वे के अनुसार, अमेरिका में 42 प्रतिशत लोग आदर्श रूप से तीन या उससे अधिक बच्चे चाहते हैं, लेकिन वास्तविकता में कई परिवार आर्थिक दबाव के कारण अपनी इच्छा के मुताबिक बड़ा परिवार नहीं बना पाते। इस तरह अमेरिका में तीन बच्चों का परिवार केवल पारिवारिक पसंद का विषय नहीं, बल्कि आय, संपत्ति और परवरिश के बढ़ते खर्च से जुड़ा सामाजिक-आर्थिक मुद्दा बनता जा रहा है।
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