
इंदौर। शहर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस और नगर निगम को कई निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने हर वार्ड से दो स्वयंसेवक नियुक्त करने, पुलिस थानों में ध्वनि मापक उपकरण उपलब्ध कराने और शिकायत के लिए संपर्क नंबर सार्वजनिक करने को कहा है।
हर वार्ड से दो स्वयंसेवक करेंगे पुलिस की मदद
हाईकोर्ट ने प्रत्येक थाना प्रभारी को अपने क्षेत्र के हर वार्ड से दो स्वयंसेवक नियुक्त करने का निर्देश दिया है। ये स्वयंसेवक अपने इलाके में ध्वनि प्रदूषण करने वाले लोगों या वाहनों की जानकारी तत्काल पुलिस तक पहुंचाएंगे। जरूरत पड़ने पर वे मोबाइल फोन से घटना का वीडियो भी रिकॉर्ड कर सकेंगे।
कोर्ट का कहना है कि कई लोग सीधे पुलिस से शिकायत करने में हिचकिचाते हैं। ऐसे में वार्ड स्तर पर स्वयंसेवक आम नागरिकों और पुलिस के बीच संपर्क का माध्यम बन सकते हैं। स्वयंसेवकों से शिकायत मिलने के बाद पुलिस को कानून के अनुसार त्वरित कार्रवाई करनी होगी।
हर थाने में पहुंचेंगे ध्वनि मापक उपकरण
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह बात आई कि पुलिस के पास ध्वनि का स्तर मापने वाले उपकरण उपलब्ध होने के बावजूद उनका इस्तेमाल प्रभावी तरीके से नहीं किया गया। इस पर कोर्ट ने निर्देश दिया कि इंदौर के प्रत्येक पुलिस थाने के पुलिसकर्मियों को ऐसे उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
अदालत ने यह भी कहा कि ध्वनि प्रदूषण की शिकायत के लिए संबंधित पुलिस थाने के संपर्क नंबर समाचार पत्रों और इंदौर पुलिस की वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाएं। इससे लोग शोर की शिकायत तत्काल संबंधित पुलिसकर्मियों तक पहुंचा सकेंगे।
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कोर्ट ने साइलेंस जोन की सूची प्रकाशित करने के पुराने निर्देश का भी उल्लेख किया। अदालत के अनुसार, राज्य की ओर से केवल समाचार पत्रों में प्रकाशित सामग्री के कुछ अंश पेश किए गए, जिसे पूर्व आदेश का पर्याप्त पालन नहीं माना गया।
अब संबंधित अधिकारियों को व्यापक प्रसार वाले समाचार पत्रों में साइलेंस जोन की पूरी सूची प्रकाशित करनी होगी। साथ ही ऐसे प्रमुख स्थानों के बारे में आम लोगों से सुझाव भी मांगे जाएंगे, जिन्हें साइलेंस जोन की सूची में शामिल किया जाना चाहिए।
कचरा गाड़ियों के तेज लाउडस्पीकर पर भी आपत्ति
हाईकोर्ट ने नगर निगम की कचरा संग्रहण गाड़ियों से निकलने वाले तेज आवाज के मामले पर भी ध्यान दिया। इन वाहनों पर लोगों को कचरा देने की सूचना देने के लिए स्वच्छता गीत बजाया जाता है। अदालत ने कहा कि सूचना देने के लिए लाउडस्पीकर जरूरी हो सकता है, लेकिन आवाज निर्धारित सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए।
कोर्ट ने नगर निगम को ध्वनि को निर्धारित डेसिबल सीमा के भीतर रखने या मौजूदा आवाज को कम से कम 25 प्रतिशत तक सीमित करने का निर्देश दिया है। संबंधित विभागों को अपने निर्देशों के पालन की रिपोर्ट तीन सप्ताह के भीतर पेश करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई नवंबर में होने की संभावना है।
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद इंदौर में ध्वनि प्रदूषण की निगरानी के लिए वार्ड स्तर पर नागरिकों की भागीदारी बढ़ेगी। अब पुलिस को शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के साथ ध्वनि मापक उपकरणों के इस्तेमाल पर भी जोर देना होगा।
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