
दशहरे पर शस्त्र पूजा के दौरान सरकारी बंदूक से फायरिंग का मामला हो तो कानून का शिकंजा कितना कसता है, इसकी एक मिसाल पड़ोसी राज्य में देखने को मिली। वहां सरकारी बंदूक से गोलियां चलाने वाली एक एसपी मैडम को नोटिस थमा दिया गया। लेकिन अपने प्रदेश में तस्वीर कुछ अलग ही नजर आई। आदिवासी बहुल जिले में दशहरे के मौके पर शस्त्र पूजा का आयोजन हुआ तो जिले के एसपी साहब ने सरकारी बंदूक से खुद भी गोलियां दागीं और कार्यक्रम में मौजूद मुख्य अतिथि सांसद को भी फायरिंग का मौका दे दिया। सांसद साहब ही नहीं, उनकी पत्नी ने भी बंदूक थामकर थांय-धांय गोलियां चला दीं। कार्यक्रम में सरकारी बंदूक से हुई इस फायरिंग का वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ।
वीडियो देखकर लोगों ने सवाल उठाए कि आखिर सरकारी हथियार से इस तरह फायरिंग की अनुमति किसने दी? खास बात यह रही कि जिस कार्यक्रम में जिले के पुलिस कप्तान खुद मौजूद थे, वहां सांसद और उनकी पत्नी तक ने निशानेबाजी का प्रदर्शन कर दिया। मामला सार्वजनिक होने के बाद भी किसी तरह की पूछताछ या नोटिस की खबर सामने नहीं आई। अब इसकी तुलना पड़ोसी राज्य की कार्रवाई से होने लगी है। वहां एसपी मैडम को नोटिस मिल गया और यहां सरकारी बंदूक से फायरिंग का वीडियो वायरल होने के बावजूद मामला ठंडे बस्ते में दिखाई दिया। सरकारी हथियार के इस्तेमाल और कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे।
हालांकि, कुछ समय बाद जारी हुई तबादला सूची में एसपी साहब को जिले से हटा दिया गया। लेकिन यह बदलाव नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था या फायरिंग वाले वायरल वीडियो से भी इसका कोई संबंध था, इस पर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई। पड़ोसी राज्य में सरकारी बंदूक से फायरिंग करने वाली एसपी मैडम को नोटिस दिए जाने और अपने प्रदेश में वायरल वीडियो के बावजूद मामला ठंडे बस्ते में दिखाई देने की तुलना होने लगी। इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी हथियारों के इस्तेमाल और पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
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