
एक छोटे जिले की कलेक्टर मैडम और सत्ताधारी दल के आदिवासी विधायक जी के बीच चल रही खटास अब खुलकर सामने आने लगी है। विधायक जी लंबे समय से मैडम के कामकाज से नाराज हैं। पहले उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर कलेक्टर मैडम की शिकायतों का पूरा पुलिंदा सौंपा था। उम्मीद थी कि ऊपर तक बात पहुंचने के बाद हालात सुधर जाएंगे, लेकिन जब शिकायतों का कोई खास असर दिखाई नहीं दिया तो विधायक जी ने खुद ही मैदान में उतरने का फैसला कर लिया। पिछले दिनों जनसुनवाई के दौरान इसका दिलचस्प नजारा देखने को मिला। एक व्यक्ति अपनी पत्नी की परेशानियों को लेकर आवेदन देने पहुंचा था। उसका कहना था कि वह लंबे समय से जनसुनवाई में चक्कर लगा रहा है, लेकिन हर बार उसे कभी एक सरकारी दफ्तर तो कभी दूसरे कार्यालय भेज दिया जाता है। उस दिन भी कलेक्टर मैडम जनसुनवाई में मौजूद नहीं थीं।
परेशान व्यक्ति ने अपनी व्यथा विधायक जी को सुना दी। फिर क्या था, विधायक जी को मैडम के कामकाज पर सवाल उठाने का एक और मौका मिल गया। विधायक जी ने मौके पर ही अपनी नाराजगी जाहिर की और बाकायदा वीडियो बनवाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि जब एक आम आदमी अपनी समस्या लेकर बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है तो उसकी सुनवाई आखिर कौन करेगा? अब यह मामला सिर्फ एक फरियादी की परेशानी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विधायक और कलेक्टर के बीच चल रही तनातनी भी सार्वजनिक हो गई। उधर, कलेक्टर मैडम फिलहाल इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।
लेकिन विधायक जी के तेवर बता रहे हैं कि उनकी नाराजगी अभी ठंडी नहीं हुई है। जनसुनवाई में फरियादियों की समस्याओं के समाधान को लेकर उठे सवाल अब प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल पर भी चर्चा का विषय बन गए हैं। विधायक जी पहले ही मुख्यमंत्री के सामने कलेक्टर मैडम की शिकायत कर चुके थे, लेकिन हालात में सुधार नहीं होने के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की। अब यह देखना होगा कि इस पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं और जनसमस्याओं के निराकरण में कितनी तेजी आती है।
- collector-mla-public-issues-dispute








