
कांग्रेस ने Budget 2026 से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए संदेश पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है, जिसमें पार्टी ने उनके बयान को देश को “पाखंड से भरा संदेश” बताया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि प्रधानमंत्री हर बजट सत्र से पहले ऐसे वक्तव्य देते हैं जो वास्तविक मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने की बजाय राजनीतिक प्रचार का हिस्सा लगते हैं। उन्होंने कहा कि यह देश की अर्थव्यवस्था और संसद के गंभीर एजेंडा को लेकर एक सकारात्मक चर्चा की जगह राजनीतिक बयानबाजी को बढ़ावा देने वाला संदेश है।
कांग्रेस के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री पारंपरिक सर्वदलीय बैठकों को नहीं बुलाते, महत्वपूर्ण मुद्दों पर विपक्ष के विचार जानने की जरूरत नहीं समझते और बिना पर्याप्त चर्चा के विधेयकों को पारित कराते हैं। उनका यह भी कहना था कि पीएम संसद में विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बजाय रैली‑भाषणों जैसा आधिकारिक भाषण देते हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर होती नजर आती है। कांग्रेस का यह भी तर्क रहा कि बजट सत्र जैसे महत्वपूर्ण मौके पर इस तरह के बयान देश को गलत संदेश भेजते हैं और इससे संसद की गरिमा कम होती है।
वहीं, सरकार के समर्थक और सत्तापक्ष के नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी के बजट सत्र की शुरूआत को सकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार संसद सत्र और बजट परिचर्चा देश के विकास और आर्थिक सुधारों के लिए महत्वपूर्ण अवसर हैं। पीएम मोदी ने भी बजट से पहले कहा है कि यह सत्र “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” के सिद्धांत पर आधारित है और इससे देश का सामाजिक‑आर्थिक ढांचा और सुदृढ़ होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और विकास को तेज करना है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बजट सत्र से पहले ऐसी टकरावपूर्ण बयानबाजी सामान्य है और इससे संसद के बहस के माहौल में तीव्रता आती है। विपक्ष और सरकार के बीच यह शब्द युद्ध संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह चर्चा का विषय बना हुआ है, खासकर जब बजट 2026 में महत्वपूर्ण आर्थिक‑धारणात्मक फैसलों की उम्मीद की जा रही है।









