Junk Food Ads Ban Proposal – जंक फूड विज्ञापनों पर 6AM से 11PM तक रोक की सिफारिश

आर्थिक सर्वे 2026 में बच्चों के बढ़ते मोटापे को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है और जंक फूड विज्ञापनों पर सख्त नियंत्रण की सिफारिश की गई है। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, यदि वर्तमान खानपान और जीवनशैली का रुझान जारी रहा, तो अगले 10 वर्षों में भारत में लगभग 8 करोड़ 30 लाख बच्चे मोटापे का शिकार हो सकते हैं। इस खतरे को देखते हुए रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि जंक फूड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के विज्ञापनों पर सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक प्रतिबंध लगाया जाए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चों पर जंक फूड विज्ञापनों का सीधा प्रभाव पड़ता है, जिससे उनकी खाने की आदतें प्रभावित होती हैं और वे अस्वस्थ भोजन की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। टीवी, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर लगातार दिखने वाले ऐसे विज्ञापन बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। आर्थिक सर्वे ने यह भी संकेत दिया है कि मोटापा केवल स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि भविष्य में देश की आर्थिक उत्पादकता पर भी असर डाल सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में बढ़ता मोटापा हृदय रोग, डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाता है। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि सरकार को स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों और डिजिटल मीडिया पर स्वस्थ खानपान को बढ़ावा देने के लिए व्यापक अभियान चलाने चाहिए। साथ ही, खाद्य उद्योग को जिम्मेदार विज्ञापन नीति अपनाने के लिए प्रेरित करने की जरूरत बताई गई है।

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जंक फूड विज्ञापनों पर समयबद्ध प्रतिबंध लागू किया जाता है, तो इससे बच्चों की खानपान संबंधी आदतों में सकारात्मक बदलाव आ सकता है। यह कदम न केवल बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करेगा, बल्कि दीर्घकालिक रूप से देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च को भी कम करने में मददगार साबित हो सकता है।

  • Gaurav Singh

    Gaurav Singh

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