सागर मेडिकल कॉलेज: रिश्तेदारों को टेंडर दिलाने का खेल,क्रय अधिकारी को प्रताड़ित करने की रची जा रही साजिश

सागर | बुंदेलखंड के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान, सागर मेडिकल कॉलेज में इन दिनों मरीजों के इलाज से ज्यादा ‘टेंडरों के इलाज‘ की चर्चा है। आरोप है कि कॉलेज के कुछ रसूखदार डॉक्टर और वर्तमान परचेज ऑफिसर (क्रय अधिकारी) की जुगलबंदी ने मिलकर एक ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया है, जिसका एकमात्र लक्ष्य पुराने वेंडर्स को हटाकर अपने चहेते रिश्तेदारों को एंट्री दिलाना है।

4 साल पुराने सिस्टम में जानबूझकर निकाली जा रही कमियां

सूत्रों के मुताबिक, कॉलेज में लगभग चार साल पहले जो कंप्यूटर सिस्टम और अन्य उपकरण स्थापित किए गए थे, उनमें अब जानबूझकर तकनीकी खामियां निकाली जा रही हैं। बताया जा रहा है कि वर्तमान परचेज ऑफिसर और उनके करीबी डॉक्टर उन पुराने टेंडरों को अपने रिश्तेदारों को नहीं दिला पाए थे, जिसकी ‘खीझ‘ अब सिस्टम पर निकाली जा रही है। कभी कंप्यूटर के पार्ट्स बदले जा रहे हैं, तो कभी मेंटेनेंस के नाम पर काम को बाधित किया जा रहा है।

हथियार की तरह हो रहा RTI और शिकायतों का इस्तेमाल

क्रय अधिकारी को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान करने के लिए साजिश का एक नया तरीका अपनाया गया है। सूत्रों का कहना है कि: 

●     प्रायोजित शिकायतें: अपने ही गुर्गों के जरिए RTI, EOW (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) और लोकायुक्त में झूठी या बढ़ा–चढ़ाकर शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं।

●     मीडिया का दुरुपयोग: कुछ विशेष समाचार माध्यमों में भ्रामक खबरें छपवाकर पूर्व से क्रय-विक्रय गतिविधियों से जुड़े अधिकारी की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है ताकि दबाव बनाकर उन्हें काम छोड़ने पर मजबूर किया जा सके।

●     सिस्टम में छेड़छाड़: जानबूझकर मशीनरी के साथ ऐसी छेड़छाड़ की जा रही है जिससे क्रय अधिकारी पर लापरवाही का आरोप लगाया जा सके।

“जब नियम और प्रक्रिया के तहत अपनों को फायदा नहीं पहुंचा पाए, तो अब ‘शिकायती राजनीति‘ के जरिए दूसरों का रास्ता रोकने की कोशिश की जा रही है। यह सीधे तौर पर सरकारी कार्य में बाधा और भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।” — (कॉलेज के ही एक अन्य विभाग के डॉक्टर)

मरीजों की सुविधाओं पर पड़ रहा असर

अधिकारियों की इस आपसी रंजिश और ‘कमीशन के खेल‘ का सीधा असर मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। कंप्यूटर सिस्टम और अन्य जरूरी चीजों के उलझने से मरीजों का डेटा, बिलिंग और जांच रिपोर्ट में देरी हो रही है। यदि प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह बंदरबांट कॉलेज की साख को पूरी तरह धूमिल कर देगी।

  • gaurav singh rajput

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