
भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देते हुए Reserve Bank of India (RBI) ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना से जुड़े ऋण नियमों में संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया है। प्रस्ताव के अनुसार अब किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लिए गए कृषि ऋण को चुकाने की अवधि बढ़ाकर 6 वर्ष तक करने की व्यवस्था की जा सकती है। इसका उद्देश्य किसानों को फसल चक्र और आय की अनिश्चितता के बीच अधिक समय और वित्तीय लचीलापन देना है। यह कदम विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए राहतकारी माना जा रहा है, जिन्हें अक्सर मौसम, बाजार और लागत के उतार-चढ़ाव के कारण समय पर ऋण चुकाने में कठिनाई होती है।
ड्राफ्ट में कृषि निवेश को अधिक वैज्ञानिक और टिकाऊ बनाने पर भी जोर दिया गया है। RBI ने मिट्टी परीक्षण, भूमि स्वास्थ्य सुधार और जैविक खेती जैसे क्षेत्रों के लिए अलग वित्तीय प्रावधान का प्रस्ताव रखा है। इसका मतलब है कि किसान अब केवल पारंपरिक इनपुट जैसे बीज या उर्वरक ही नहीं, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता जांच, जैविक खाद, प्राकृतिक खेती तकनीकों और पर्यावरण-अनुकूल कृषि प्रणालियों पर भी ऋण प्राप्त कर सकेंगे। इससे कृषि उत्पादन को टिकाऊ और लागत प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव संभव माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 6 वर्ष की लंबी पुनर्भुगतान अवधि से किसानों पर ऋण दबाव कम होगा और वे दीर्घकालिक कृषि निवेश कर सकेंगे। अक्सर किसान अल्पकालिक ऋण अवधि के कारण जल्दी आय देने वाली फसलों पर निर्भर हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता और कृषि विविधता प्रभावित होती है। नई व्यवस्था से किसानों को फसल चक्र बदलने, बागवानी या जैविक खेती अपनाने और मिट्टी सुधार में निवेश करने का समय मिल सकता है। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने और कृषि जोखिम कम करने में सहायक माना जा रहा है।









