कमिश्नर प्रणाली’ के दावों के बीच नशे की गिरफ्त में MP, क्या केवल ‘ट्रांसफर-पोस्टिंग’ तक सिमट गई है मोहन सरकार?

भोपाल/इंदौर | राज्य ब्यूरो मध्य प्रदेश में कानूनव्यवस्था की स्थिति अबराम भरोसेनजर आने लगी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के राज में प्रदेश के अपराधी बेलगाम हैं और नशे का कारोबार गलियों से निकलकर युवाओं की रगों तक पहुँच चुका है। जनता सवाल पूछ रही है कि क्या प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी और सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग केवलफाइलें पलटनेऔरपसंदीदा पोस्टिंगके खेल में ही व्यस्त रहेंगे, या प्रदेश को इस गर्त से निकालने के लिए कोई ठोस कदम भी उठाएंगे?

सत्ता काव्यापारया जनता की पुकार?

प्रदेश के गलियारों में चर्चा आम है कि सचिवालय से लेकर पुलिस मुख्यालय तक, अधिकारियों का पूरा ध्यान सिर्फ इस बात पर है कि मलाईदार कुर्सियां किसे मिलेंगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव की कार्यशैली पर अब तीखे सवाल उठने लगे हैं। आरोप लग रहे हैं कि सरकार का पूरा तंत्रट्रांसफरपोस्टिंगकी इंडस्ट्री चलाने औरआर्थिक प्रबंधन‘ (व्यापारिक सांठगांठ) में लगा हुआ है।

जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में मौन साध लें, तो अपराधी का दुस्साहस बढ़ना लाजिमी है। आज प्रदेश का गृह विभाग सिर्फ कागजी आंकड़ों में अपराध कम कर रहा है, जबकि जमीनी हकीकत खून से सनी हुई है।

नशाखोरी: उड़ता मध्य प्रदेश की आहट

ग्वालियर से लेकर इंदौर और भोपाल तक, ‘सिंथेटिक ड्रग्सऔरअवैध शराबका कारोबार अब कुटीर उद्योग जैसा फैलता जा रहा है।

     IAS-IPS की चुप्पी: जिलों की कमान संभाल रहे कलेक्टर्स और एसपी के पास वीआईपी मूवमेंट से फुर्सत नहीं है।

     इंटेलिजेंस फेलियर: नशे की बड़ी खेप प्रदेश की सीमाओं में कैसे दाखिल हो रही है? क्या इसमें खाकी और खादी का संरक्षण प्राप्त है?

     युवा पीढ़ी दांव पर: स्कूलकॉलेजों के बाहर खुलेआम बिकता नशा इस बात का प्रमाण है कि पुलिस का खौफ खत्म हो चुका है।

क्राइम ग्राफ: विकास के दावों के पीछे छिपती चीखें

बीते कुछ महीनों में हत्या, लूट और बलात्कार की घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। प्रदेश के आला अधिकारी जो खुद कोसिंघमदिखाने की कोशिश करते हैं, वे अब केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया तक सीमित रह गए हैं।

     ट्रांसफर का खेल: अधिकारियों को काम करने के बजाय अपनी कुर्सी बचाने के लिए राजनीतिक आकाओं की परिक्रमा करनी पड़ रही है।

     लूट का तंत्र: क्या भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो गई हैं कि अपराधियों पर कार्रवाई करने के बजाय वसूली को प्राथमिकता दी जा रही है?

सुधरिए सरकार, वरना इतिहास माफ नहीं करेगा

मोहन यादव सरकार को यह समझना होगा कि केवलबुलडोजरका शोर मचाने से न्याय नहीं मिलता। जब तक शासन के भीतर बैठे भ्रष्ट अधिकारी और पैसे की भूख को खत्म नहीं किया जाएगा, तब तक मध्य प्रदेश अपराध मुक्त नहीं हो सकता। प्रदेश की जनता ने आपको सेवा के लिए चुना है, ‘व्यापारऔरवसूलीके लिए नहीं।

  • Gaurav Singh

    Gaurav Singh

    Related Posts

    उज्जैन में 3-5 अप्रैल 2026 को होगा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ – मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री मोहन यादव भी होंगे शामिल

    उज्जैन, मध्यप्रदेश — उज्जैन में अप्रैल 2026 के पहले सप्ताह में एक ऐतिहासिक आयोजन होने जा…

    आगे पढ़ें
    ₹20,000 करोड़ MFI क्रेडिट गारंटी योजना का असर: NBFC-MFI सेक्टर को राहत या सीमित फायदा?

    भारत सरकार द्वारा शुरू की गई ₹20,000 करोड़ की माइक्रोफाइनेंस क्रेडिट गारंटी योजना (MFI Credit Guarantee…

    आगे पढ़ें

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    उज्जैन में 3-5 अप्रैल 2026 को होगा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ – मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री मोहन यादव भी होंगे शामिल

    उज्जैन में 3-5 अप्रैल 2026 को होगा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ – मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री मोहन यादव भी होंगे शामिल

    ₹20,000 करोड़ MFI क्रेडिट गारंटी योजना का असर: NBFC-MFI सेक्टर को राहत या सीमित फायदा?

    ₹20,000 करोड़ MFI क्रेडिट गारंटी योजना का असर: NBFC-MFI सेक्टर को राहत या सीमित फायदा?

    बंगाल का रण और चुनाव आयोग के फैसले: क्या अधिकारियों के तबादले तय करेंगे सत्ता का भविष्य?

    बंगाल का रण और चुनाव आयोग के फैसले: क्या अधिकारियों के तबादले तय करेंगे सत्ता का भविष्य?

    राजनीति के ‘शिखर’ और जनसेवा के ‘पर्याय’: क्या अपनों की ही घेराबंदी का शिकार हो रहे हैं जननायक संजय पाठक?

    राजनीति के ‘शिखर’ और जनसेवा के ‘पर्याय’: क्या अपनों की ही घेराबंदी का शिकार हो रहे हैं जननायक संजय पाठक?

    ‘मुखिया’ की पसंद भी ठुकराई, ADG साहब की नज़र अब दिल्ली के दरबार पर

    ‘मुखिया’ की पसंद भी ठुकराई, ADG साहब की नज़र अब दिल्ली के दरबार पर