
भारत में 1 अप्रैल से ईंधन नीति में बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। सरकार ने तेल विपणन कंपनियों को 20% एथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल (E20) व्यापक रूप से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इस व्यवस्था के तहत पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर 20% तक कर दी जाएगी, ताकि आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटे और स्वदेशी बायोफ्यूल उपयोग को बढ़ावा मिले। नई व्यवस्था के अनुसार ईंधन स्टेशनों पर E20 पेट्रोल बेचना अनिवार्य होगा और इसे चरणबद्ध तरीके से देशभर में लागू किया जा रहा है। एथेनॉल मुख्यतः गन्ना व अन्य जैव स्रोतों से तैयार होता है, इसलिए इससे किसानों की आय और कृषि आधारित उद्योग को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। ऊर्जा सुरक्षा और उत्सर्जन घटाने के लक्ष्य के तहत यह कदम भारत की दीर्घकालिक ईंधन रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का कहना है कि पुरानी या E10 मानक पर बनी गाड़ियों में E20 पेट्रोल के उपयोग से माइलेज में कुछ कमी और इंजन पर अतिरिक्त दबाव की आशंका हो सकती है। विशेषकर 2010 से पहले के मॉडल या जिन वाहनों के पार्ट्स E20-संगत नहीं हैं, उनमें फ्यूल सिस्टम और रबर सील पर असर संभव है। नई गाड़ियां, खासकर 2023 के बाद लॉन्च मॉडल, सामान्यतः E20-अनुकूल डिजाइन के साथ आ रही हैं। सरकार और वाहन निर्माताओं ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वे वाहन निर्माता की E20 संगतता संबंधी जानकारी जांच लें। यदि वाहन E20 के लिए प्रमाणित नहीं है, तो नियमित सर्विस और इंजन मॉनिटरिंग जरूरी होगी। दीर्घकाल में E20 को भारत में स्वच्छ, सस्ता और घरेलू ईंधन विकल्प के रूप में स्थापित करने की योजना है।









