ACS की पोल खुली, दोस्त को टेंडर दिलाने की कोशिश हुई नाकाम

प्रशासनिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां ईमानदारी का चोला ओढ़े एक वरिष्ठ अधिकारी का असली चेहरा बेनकाब हुआ है। मामला एक बड़े टेंडर से जुड़ा है, जहां एक एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ACS) स्तर के अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करने की कोशिश की, लेकिन जूनियर अधिकारियों की सख्ती ने उनके इरादों पर पानी फेर दिया।

सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा मामला एक बड़े सरकारी विभाग द्वारा जारी किए गए ‘स्क्रैप टेंडर’ (कबाड़ बेचने के टेंडर) से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि वर्तमान में ‘लूप लाइन’ में पदस्थ एक एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, जो आमतौर पर खुद को बेहद ईमानदार और उसूलों वाला बताते हैं, बड़े टेंडर के सामने डिगते नजर आए।

जब विभाग ने स्क्रैप बेचने की प्रक्रिया शुरू की, तो इन साहब के एक करीबी दोस्त ने टेंडर हासिल करने के लिए उनसे संपर्क साधा। अपनी ‘छवि ईमानदारी’ को ताक पर रखते हुए, ACS महोदय ने विभाग के जूनियर आईएएस (IAS) अधिकारियों पर अपने दोस्त की कंपनी को टेंडर देने के लिए भारी दबाव बनाया।

लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब ईमानदारी की मिसाल इन जूनियर अधिकारियों ने वरिष्ठ अधिकारी के इस अनुचित दबाव के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया। जूनियर अफसरों ने न सिर्फ हस्तक्षेप करने से मना किया, बल्कि सीनियर साहब को दो टूक शब्दों में सलाह दे डाली कि वे इस बारे में संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों से ही बात करें।

काफी जोड़-तोड़ और रसूख दिखाने के बावजूद, अंततः ACS अपने दोस्त को वो टेंडर नहीं दिला सके। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सिस्टम में अभी भी ऐसे अधिकारी मौजूद हैं जो रसूखदारों के आगे झुकने के बजाय नियमों का पालन करना बेहतर समझते हैं।

प्रशासनिक महकमे में अब इस ‘दिखावे की ईमानदारी’ और टेंडर के इस खेल की जमकर चर्चा हो रही है। इस खबर पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं। देखते रहिए ब्रांडवाणी समाचार।

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gaurav singh rajput

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