
मध्य प्रदेश की राजनीति और अफसरशाही के गलियारों से इस वक्त एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। राजधानी भोपाल से आई इस खबर ने शासन-प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। मामला जुड़ा है दो सीनियर IPS अधिकारियों से, जिनके आपसी तालमेल और कथित ‘लालच’ ने सरकार को एक बड़ी मुसीबत में डाल दिया है।
दरअसल, यह पूरा मामला अवैध वसूली से जुड़ा है। कुछ समय पहले राज्य की सीमाओं पर स्थित परिवहन नाकों पर अवैध वसूली की कई शिकायतें केंद्र सरकार तक पहुंची थीं। केंद्र के कड़े रुख के बाद, राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए इन नाकों को बंद करने का निर्णय लिया था। मकसद था— भ्रष्टाचार पर लगाम और पारदर्शी व्यवस्था।
लेकिन, पर्दे के पीछे कुछ और ही खेल चल रहा था। सूत्रों के मुताबिक, विभाग के ही कुछ रसूखदार अधिकारियों ने कथित तौर पर साजिश की और सरकार के इस जनहितैषी फैसले के खिलाफ एक जनहित याचिका (PIL) दायर करवा दी।
हैरानी की बात यह है कि यह ‘जिन्न’ काफी समय से बंद था, लेकिन जैसे ही विभाग के कमिश्नर बदले, स्थितियां भी बदल गईं। आरोप लग रहे हैं कि नए कमिश्नर ने कोर्ट में सरकार का पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखा, जिसका नतीजा यह हुआ कि सरकार के फैसले के विपरीत फैसला आ गया।
अब इस मामले ने तूल पकड़ लिया है। विभिन्न यूनियनों और कुछ केंद्रीय नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम की शिकायत ‘उच्च स्तर’ पर करने की तैयारी कर ली है। यह चर्चा गर्म है कि अगर सरकार के खिलाफ ज्यादा नाराजगी हुई, तो संबंधित कमिश्नर और उन सीनियर IPS अधिकारियों पर गाज गिरना तय है, जिन्होंने अपने निजी स्वार्थ के लिए सरकार की छवि दांव पर लगा दी।
अब देखना यह होगा कि क्या मुख्यमंत्री इस मामले में कोई कठोर कदम उठाते हैं या फिर अफसरशाही का यह ‘सिंडिकेट’ इसी तरह सरकार के फैसलों को चुनौती देता रहेगा। भोपाल से ब्रेकिंग समाचार के लिए ब्यूरो रिपोर्ट।
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