क्या मोहन यादव सरकार में ACS और मंत्री से भी ऊपर हैं डॉ. सुनील मंडेलिया? लोकायुक्त के गंभीर आरोपों के बाद भी कार्रवाई शून्य, 15 जून की ट्रांसफर डेडलाइन पर टिकी निगाहें!

भोज यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार पर सीएमओ मेहरबान क्यों? उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और एसीएस अनुपम राजन की ‘नो-वैल्यू‘? क्या मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस‘ नीति में मंडेलिया के लिए कोई खास छूट है?

मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) का दावा करती है। मुख्यमंत्री मंचों से साफ कहते हैं कि दागी और विवादित अफसरों के लिए इस सरकार में कोई जगह नहीं है। लेकिन जब बात मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय (Bhoj Open University) के रजिस्ट्रार डॉ. सुनील मंडेलिया की आती है, तो सरकार की यह नीति अचानक ठंडी पड़ती क्यों दिखाई देती है?

आज गलियारों में यह सवाल तैर रहा है कि आखिर डॉ. सुनील मंडेलिया पर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और मुख्यमंत्री निवास इस कदर मेहरबान क्यों हैं?

चर्चाएं गर्म हैं कि क्या डॉ. सुनील मंडेलिया का रसूख उच्च शिक्षा विभाग के मुखिया और अपर मुख्य सचिव (ACS) अनुपम राजन और खुद उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से भी बड़ा हो चुका है? लोकायुक्त में गंभीर शिकायतें और विभाग के भीतर कई गंभीर आरोप लगने के बावजूद, डॉ. मंडेलिया अब तक न तो सस्पेंड हुए और न ही उन पर कोई कड़ा एक्शन लिया गया।

प्रशासनिक हलकों में लोग दबी जुबान में पूछ रहे हैं—क्या उच्च शिक्षा मंत्री और एसीएस की इस मामले में कोई वैल्यू नहीं बची है? क्या एक विश्वविद्यालय का रजिस्ट्रार शासन के इतने बड़े कर्णधारों से भी ऊपर बैठ गया है?

जब छोटे-छोटे कर्मचारियों पर जरा सी लापरवाही के लिए निलंबन (Suspension) की गाज गिर जाती है, तो इतने गंभीर आरोपों से घिरे डॉक्टर मंडेलिया को अभयदान क्यों मिला हुआ है? क्या डॉ. मोहन यादव की जीरो टॉलरेंस की नीति में सुनील मंडेलिया के लिए मध्य प्रदेश में कोई अलग से गुप्त क्लॉज (नियम) बनाया गया है? यह दोहरा रवैया सरकार की साख पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

मध्य प्रदेश में इस समय तबादलों (Transfers) का दौर चल रहा है और सरकार ने इसके लिए 15 जून तक का समय तय किया है। अब पूरा प्रदेश और उच्च शिक्षा विभाग टकटकी लगाए देख रहा है कि:

  • क्या इस ट्रांसफर लिस्ट में डॉ. सुनील मंडेलिया का नाम शामिल होगा और उन्हें हटाया जाएगा?
  • या फिर इस बार भी उनका रसूख भारी पड़ेगा और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार व एसीएस अनुपम राजन को अपने ही विभाग के एक अफसर के सामने फिर से शर्मिंदा होना पड़ेगा?

अगर 15 तारीख तक मंडेलिया पर कोई फैसला नहीं होता, तो यह साफ हो जाएगा कि विभाग के आला अफसरों और मंत्रियों की फाइलों से ज्यादा वजन डॉ. मंडेलिया के ‘पॉलिटिकल कनेक्शन’ में है।

ब्रांडवाणी समाचार इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है। देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने ‘जीरो टॉलरेंस’ के इकबाल को बुलंद रखते हैं, या फिर व्यवस्था एक बार फिर रसूख के आगे नतमस्तक होती है।

“लोकायुक्त के आरोप, विभाग की किरकिरी… फिर भी कुर्सी पर बरकरार! क्या भोज यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. सुनील मंडेलिया के सामने बेबस है उच्च शिक्षा विभाग? देखिए ब्रांडवाणी समाचार की यह विशेष रिपोर्ट।”

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  • gaurav singh rajput

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