
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती लोकप्रियता के बीच इसकी लागत को लेकर नई बहस छिड़ गई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, एक बड़ी कंपनी ने Anthropic के AI मॉडल Claude के उपयोग पर महज एक महीने में लगभग 500 मिलियन डॉलर (करीब ₹4,200 करोड़) खर्च कर दिए। इस खुलासे ने टेक इंडस्ट्री में AI की वास्तविक लागत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसी बीच, Microsoft ने अपने हजारों कर्मचारियों के लिए उपलब्ध Claude Code लाइसेंस बंद करने का फैसला लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी 30 जून 2026 तक अधिकांश आंतरिक Claude Code लाइसेंस समाप्त कर रही है और कर्मचारियों को अपने GitHub Copilot CLI प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित कर रही है।
जानकारों का कहना है कि Claude Code का उपयोग कर्मचारियों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गया था, लेकिन इसके साथ टोकन-आधारित बिलिंग तेजी से बढ़ती गई। AI टूल्स के व्यापक उपयोग ने कंपनियों के बजट पर भारी दबाव डालना शुरू कर दिया है। माइक्रोसॉफ्ट का आधिकारिक रुख टूल्स को एकीकृत करने का है, लेकिन कई रिपोर्ट्स में बढ़ती लागत को भी एक बड़ा कारण बताया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना AI उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। जहां एक ओर AI उत्पादकता बढ़ाने का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर बड़े स्तर पर इसके इस्तेमाल की लागत कई कंपनियों के लिए चुनौती बनती जा रही है। आने वाले समय में AI कंपनियों को प्रदर्शन के साथ-साथ लागत नियंत्रण पर भी अधिक ध्यान देना पड़ सकता है।
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