
सार:
मुरैना में भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष अभिषेक जाटव को लेकर संगठन के भीतर गंभीर आरोप लगाए जाने का मामला सामने आया है। आरोप लगाने वालों का दावा है कि जिला अध्यक्ष कथित तौर पर भाजपा से जुड़े एक मंत्री के लिए काम कर रहे हैं और राजनीतिक स्तर पर तालमेल बनाया जा रहा है। मामले की जानकारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुनील बैरसिया और प्रदेश सचिव रणवीर जाटव तक पहुंचाए जाने की बात भी कही गई है। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना बाकी है।
विस्तार:
मुरैना में भीम आर्मी संगठन के भीतर जिला अध्यक्ष अभिषेक जाटव को लेकर विवाद खड़ा होने का दावा किया जा रहा है। संगठन से जुड़े कुछ लोगों की ओर से जिला अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोपों को लेकर संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की जा रही है।
आरोप लगाने वालों का कहना है कि जिला अध्यक्ष द्वारा कथित तौर पर भाजपा से जुड़े एक मंत्री के लिए काम किया जा रहा है और राजनीतिक स्तर पर तालमेल बनाया जा रहा है। इन आरोपों के सामने आने के बाद संगठन के भीतर गतिविधियों और जिला नेतृत्व की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
भाजपा से तालमेल का लगाया आरोप
मामले में आरोप लगाया गया है कि जिला अध्यक्ष अभिषेक जाटव कथित रूप से भाजपा से जुड़े एक मंत्री के साथ राजनीतिक तालमेल कर रहे हैं। आरोप लगाने वालों का दावा है कि इस तरह की गतिविधियां संगठन की विचारधारा और बहुजन समाज के हितों के विपरीत हैं।
हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण फिलहाल सामने नहीं आया है। ऐसे में आरोपों की वास्तविकता का फैसला जांच के बाद ही हो सकता है।
प्रदेश नेतृत्व तक मामला पहुंचने का दावा
बताया गया है कि पूरे मामले की जानकारी भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील बैरसिया और प्रदेश सचिव रणवीर जाटव के संज्ञान में भी लाई गई है। आरोप लगाने वाले पक्ष की मांग है कि वरिष्ठ पदाधिकारी पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तथ्यों की जांच करें।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी जिला पदाधिकारी पर संगठन की नीतियों के विपरीत काम करने के आरोप लगते हैं, तो संगठन के स्तर पर उनकी जांच होना जरूरी है। इससे आरोपों की सच्चाई सामने आने के साथ संगठन के भीतर पारदर्शिता भी बनी रह सकती है।
आर्थिक लेन-देन को लेकर भी आरोप
मामले में कुछ लोगों की ओर से यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कथित तौर पर कुछ लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए पैसे दिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
आर्थिक लेन-देन से जुड़े आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। ऐसे में यदि संगठन इस मामले की जांच कराता है तो संबंधित आरोपों से जुड़े दस्तावेज, लेन-देन या अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा सकती है।
कार्यकर्ताओं में उठ रहे सवाल
इन आरोपों के सामने आने के बाद भीम आर्मी से जुड़े कार्यकर्ताओं और बहुजन समाज के लोगों के बीच कई सवाल उठने की बात कही जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी पदाधिकारी पर संगठन की विचारधारा से अलग जाकर राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है, तो इसकी निष्पक्ष जांच क्यों न कराई जाए।
कार्यकर्ताओं के बीच यह भी चर्चा है कि संगठन के पदाधिकारियों की जिम्मेदारी केवल संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित नहीं होती, बल्कि उन्हें संगठन की विचारधारा और कार्यकर्ताओं के विश्वास को भी बनाए रखना होता है।
निष्पक्ष जांच से सामने आएगा सच
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल सामने आए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए आरोपों को तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। संबंधित जिला अध्यक्ष अभिषेक जाटव की ओर से भी इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ऐसे में निष्पक्ष जांच ही यह स्पष्ट कर सकती है कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में संगठन के पद का इस्तेमाल किसी राजनीतिक या आर्थिक गतिविधि के लिए किया गया।
यदि संगठन का वरिष्ठ नेतृत्व जांच के लिए कोई समिति गठित करता है या संबंधित पक्षों से जवाब मांगता है, तो मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल मुरैना में भीम आर्मी के जिला नेतृत्व को लेकर उठे इन आरोपों ने संगठन के भीतर चर्चा जरूर तेज कर दी है। अब नजर संगठन के प्रदेश नेतृत्व और संबंधित पदाधिकारियों की प्रतिक्रिया पर है। आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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