कोरोना काल के सप्लायर और पूर्व ACS की जमीन पर अस्पताल, रिपोर्ट ने उठाए हितों के टकराव पर सवाल

भोपाल, 7 अक्टूबर 2026। कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य विभाग की खरीद और उसके बाद हुए कारोबारी संबंधों को लेकर एक नई रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश में सवाल खड़े किए हैं। ब्रांडवाणी की एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग को चिकित्सा सामग्री और सेवाएं उपलब्ध कराने वाले कुछ आपूर्तिकर्ता अब भोपाल के बावड़िया कलां में पूर्व स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) मोहम्मद सुलेमान और उनकी पत्नी से जुड़ी जमीन पर प्रस्तावित अस्पताल परियोजना से जुड़े हैं। रिपोर्ट ने इस पूरे मामले में संभावित हितों के टकराव और भूमि उपयोग से जुड़े सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट से अलग उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है।

बावड़िया कलां की जमीन को लेकर क्या दावा है?

ब्रांडवाणी के अनुसार मध्य प्रदेश के भू-अभिलेखों में भोपाल जिले की कोलार तहसील के बावड़िया कलां क्षेत्र में खसरा क्रमांक 9/2/8 (स) पर मोहम्मद सुलेमान और उनकी पत्नी सीमा सुलेमान के नाम दर्ज हैं। रिपोर्ट में इस भूखंड का क्षेत्रफल 0.1010 हेक्टेयर यानी करीब 10,871 वर्गफुट बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक जमीन का उपयोग रिकॉर्ड में आवासीय दर्ज है और 2023 में तहसीलदार न्यायालय के आदेश के बाद राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव हुआ। इसके बाद मार्च 2025 में भूमि के डायवर्सन से संबंधित राशि जमा किए जाने का भी उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है।

इसी के आसपास खसरा क्रमांक 9/2/9 (स) का भी उल्लेख है, जिस पर अन्य लोगों के नाम दर्ज बताए गए हैं। रिपोर्ट का दावा है कि दोनों भूखंडों की भूमि संबंधी प्रक्रिया लगभग एक ही अवधि में आगे बढ़ी। इसी आधार पर रिपोर्ट ने सवाल उठाया है कि क्या इन जमीनों को अस्पताल परियोजना के लिए तैयार किया गया।

हालांकि, केवल राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज भूमि स्वामित्व या डायवर्सन की जानकारी से किसी कारोबारी साझेदारी या अनियमितता का निष्कर्ष स्वतः नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए संबंधित निर्माण अनुमति, कंपनी रिकॉर्ड, साझेदारी दस्तावेज और अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच जरूरी होगी।

कोरोना काल के ठेकों को लेकर क्या सवाल उठे?

रिपोर्ट में कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई आपातकालीन खरीद का भी उल्लेख किया गया है। उस समय मोहम्मद सुलेमान स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव थे। Brandwaani का दावा है कि महामारी के दौरान कुछ निजी कंपनियों और आपूर्तिकर्ताओं को सीटी स्कैन मशीन, लैब टेस्टिंग, दवाओं और मेडिकल लॉजिस्टिक्स से जुड़े काम मिले थे।

रिपोर्ट का मुख्य सवाल यह है कि क्या कोरोना काल में सरकारी स्वास्थ्य विभाग को सेवाएं या सामग्री उपलब्ध कराने वाले कारोबारी बाद में पूर्व अधिकारी से जुड़े निजी अस्पताल प्रोजेक्ट में भी साझेदार बने।

यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि किसी कंपनी को सरकारी ठेका मिलना अपने आप में अनियमितता साबित नहीं करता। इसी तरह किसी पूर्व सरकारी अधिकारी के साथ बाद में कारोबारी संबंध होना भी अपने आप में भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं है। इसके लिए ठेकों की प्रक्रिया, बोली दस्तावेज, भुगतान, कंपनी के स्वामित्व और अस्पताल में निवेश की वास्तविक संरचना की जांच आवश्यक होगी।

हितों के टकराव पर उठे गंभीर सवाल

ब्रांडवाणी ने अपनी रिपोर्ट में पूछा है कि यदि कोरोना काल में किसी अधिकारी के अधीन रहे आपूर्तिकर्ता बाद में उसी अधिकारी या उनके परिवार से जुड़ी निजी संपत्ति पर कारोबारी साझेदार बनते हैं, तो क्या यह Conflict of Interest के दायरे में आता है। रिपोर्ट ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि जमीन का राजस्व रिकॉर्ड में उपयोग आवासीय है तो उस पर अस्पताल जैसी व्यावसायिक परियोजना के लिए किन प्रशासनिक अनुमतियों के आधार पर निर्माण हो रहा है।

इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों, स्थानीय निकायों, भूमि स्वामी, अस्पताल परियोजना से जुड़े निवेशकों और संबंधित कंपनियों के आधिकारिक दस्तावेजों से ही स्पष्ट हो सकता है। अभी उपलब्ध रिपोर्ट में इन सभी सवालों पर किसी सक्षम जांच एजेंसी के अंतिम निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है।

जांच की मांग, वित्तीय लेन-देन की पड़ताल पर जोर

रिपोर्ट ने लोकायुक्त, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) और अन्य सक्षम एजेंसियों से पूरे मामले की जांच की जरूरत पर सवाल उठाए हैं। खासतौर पर अस्पताल परियोजना में लग रही पूंजी के स्रोत, जमीन के उपयोग में बदलाव, निर्माण की अनुमति और कोरोना काल के सरकारी अनुबंधों के बीच किसी संभावित संबंध की जांच की मांग की गई है।

पूरे मामले में आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित सरकारी विभाग, जांच एजेंसियां या परियोजना से जुड़े पक्ष इन आरोपों और सवालों पर क्या आधिकारिक जानकारी देते हैं। फिलहाल ब्रांडवाणी की रिपोर्ट ने दस्तावेजों के आधार पर कई सवाल उठाए हैं, लेकिन इन सवालों को अंतिम निष्कर्ष मानने से पहले स्वतंत्र दस्तावेजी और आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

 

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Srota Swati Tripathy

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