
भोपाल, 7 अक्टूबर 2026। मध्य प्रदेश में गरीब और जरूरतमंद परिवारों को अंतिम संस्कार के लिए निशुल्क शव वाहन उपलब्ध कराने की योजना को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। ब्रांडवाणी की एक पड़ताल में दावा किया गया है कि प्रदेश में संचालित 148 शव वाहनों में से 101 वाहन निर्धारित शर्तों के मुकाबले पुराने हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कई वाहन 2 से 3 लाख किलोमीटर तक चल चुके हैं। इसके अलावा 17 जिलों में आवंटित वाहन मौके पर उपलब्ध नहीं होने का भी दावा किया गया है। रिपोर्ट ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।
नई सेवा के नाम पर पुराने वाहनों के इस्तेमाल का दावा
रिपोर्ट के अनुसार निशुल्क शव वाहन सेवा के लिए तय टेंडर और अनुबंध में यह शर्त थी कि सेवा शुरू होने के समय वाहन एक वर्ष से अधिक पुराने नहीं होने चाहिए। वाहनों को तकनीकी रूप से फिट और GPS से लैस रखने की शर्त भी बताई गई है। लेकिन ब्रांडवाणी की पड़ताल में दावा किया गया है कि 148 वाहनों के बेड़े में 101 पुराने वाहन शामिल हैं। इनमें 2020 मॉडल के 41 और 2022 मॉडल के 60 वाहन बताए गए हैं। वहीं 2024 मॉडल का केवल एक और 2025 मॉडल के 46 वाहन होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कुछ पुराने वाहनों का संचालन 2 से 3 लाख किलोमीटर तक हो चुका है। ऐसे वाहनों की तकनीकी स्थिति और फिटनेस को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन सभी दावों की स्वतंत्र सरकारी पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिली है।
हर महीने 85.84 लाख रुपये के भुगतान का दावा
शव वाहन सेवा के संचालन के लिए प्रति वाहन 58 हजार रुपये प्रतिमाह भुगतान किए जाने का दावा रिपोर्ट में किया गया है। 148 वाहनों के आधार पर यह राशि करीब 85.84 लाख रुपये प्रति माह और सालाना लगभग 10.30 करोड़ रुपये बैठती है। रिपोर्ट का सवाल है कि जब कुछ वाहन अनुबंध में निर्धारित उम्र और स्थिति के अनुरूप नहीं बताए जा रहे हैं, तो उनके संचालन के लिए भुगतान की प्रक्रिया कैसे हो रही है और वाहनों की गुणवत्ता एवं उपलब्धता का सत्यापन किस स्तर पर किया जा रहा है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि भुगतान की राशि और वाहन की स्थिति से जुड़े ये आंकड़े Brandwaani की पड़ताल में प्रस्तुत किए गए हैं। किसी सरकारी जांच या ऑडिट द्वारा इन आंकड़ों को अंतिम रूप से सही ठहराए जाने की जानकारी इस रिपोर्ट में नहीं है।
17 जिलों में वाहन उपलब्ध नहीं होने का दावा
ब्रांडवाणी ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में दावा किया है कि कागजों में आवंटित 17 शव वाहन संबंधित जिलों में मौजूद नहीं मिले। रिपोर्ट के अनुसार भोपाल में चार में से दो वाहन खराब बताए गए हैं। नीमच और रतलाम में निर्धारित संख्या के वाहन उपलब्ध नहीं होने का दावा किया गया है। सिवनी में भी दो वाहनों के नदारद होने और जबलपुर में दो वाहनों के तकनीकी खराबी के कारण खड़े होने की बात रिपोर्ट में कही गई है। इंदौर और शहडोल में भी स्वीकृत संख्या के मुकाबले कम वाहनों के काम करने का दावा किया गया है।
अगर ये दावे आधिकारिक जांच में सही पाए जाते हैं तो इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ सकता है, जिन्हें किसी परिजन की मृत्यु के बाद शव को अस्पताल या घर से अंतिम संस्कार स्थल तक ले जाने के लिए तत्काल परिवहन की जरूरत होती है।
विदिशा में पुराने वाहन लेने से इनकार का दावा
रिपोर्ट में विदिशा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के रुख का भी उल्लेख किया गया है। दावा है कि जब वहां पुराने वाहनों को उपलब्ध कराने की कोशिश हुई तो CMHO ने अनुबंध की शर्तों का हवाला देते हुए उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
रिपोर्ट के अनुसार इसके बाद विदिशा को चार नए 2025 मॉडल के वाहन उपलब्ध कराए गए। इस मामले को उदाहरण के तौर पर रखते हुए सवाल उठाया गया है कि यदि एक जिले में अनुबंध की शर्तों का पालन कराया जा सकता है तो दूसरे जिलों में पुराने वाहनों को लेकर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
NHM और प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि वाहनों से जुड़े सवाल पहले भी शासन और स्वास्थ्य विभाग के स्तर तक उठाए गए थे, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। ब्रांडवाणी ने NHM के मिशन संचालक, अपर मिशन संचालक और मुख्य सचिव की भूमिका तथा निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, उपलब्ध सामग्री के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि किसी अधिकारी की मिलीभगत या भ्रष्टाचार साबित हो चुका है। इसके लिए स्वतंत्र जांच, टेंडर रिकॉर्ड, वाहन पंजीयन, फिटनेस प्रमाणपत्र, भुगतान दस्तावेज और जिलावार उपलब्धता के सरकारी रिकॉर्ड की जांच आवश्यक होगी।
पहले भी सामने आ चुके हैं शव वाहन योजना से जुड़े सवाल
मध्य प्रदेश की निशुल्क शव वाहन योजना पहले भी सवालों में रही है। जुलाई 2025 में NDTV ने रिपोर्ट किया था कि भोपाल के पास बड़ी संख्या में शव वाहन उपयोग में आने के बजाय मैदान में खड़े थे और कुछ वाहन बारिश व कीचड़ में खराब स्थिति में पहुंच गए थे। उस समय भी योजना के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठे थे।
अब नई रिपोर्ट में पुराने वाहनों के संचालन, जिलों में वाहनों की उपलब्धता और सरकारी भुगतान की निगरानी से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि टेंडर की शर्तों का पालन हुआ या नहीं और सरकारी धन का भुगतान निर्धारित सेवा के अनुरूप किया गया या नहीं।
- mp-shav-vahan-scam-old-vehicles-nhm








