
भोपाल: मध्यप्रदेश की नौकरशाही से जुड़ी एक महत्वपूर्ण सूचना ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है. प्रत्यक्ष चयन से नियुक्त एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, जो जिले में पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत थे और अपनी सख्त व निष्पक्ष कार्यशैली के लिए पहचाने जाते थे, उनका अचानक किया गया स्थानांतरण अब प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया है. पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी निर्देश के बाद जिले की प्रशासनिक स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है.
ब्रांडवाणी न्यूज को मिली जानकारी के अनुसार क्षेत्र की एक प्रभावशाली महिला जनप्रतिनिधि पिछले काफी समय से इस अधिकारी को हटाने की मांग उठा रही थीं. उन्होंने कई स्तरों पर अपनी असंतुष्टि व्यक्त करते हुए सरकार और पार्टी नेतृत्व तक शिकायतें भेजी थीं. अंततः जैसे ही स्थानांतरण आदेश जारी हुआ और अधिकारी को राजधानी स्थित मंत्रालय में संबद्ध किया गया, उसके बाद राजनीतिक गलियारों में इस निर्णय को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं.
ये भी पढ़े – रिटायरमेंट के बाद भी चर्चाओं में पूर्व IAS अधिकारी, साहब का खेल निराला
आदेश सामने आने के बाद उक्त महिला जनप्रतिनिधि ने अपने करीबी समर्थकों से बातचीत में इस फैसले को अपनी पहल का परिणाम बताया है. हालांकि इस दावे को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं और अटकलें भी चल रही हैं।इस जिले में प्रशासनिक अधिकारियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच मतभेद की स्थिति समय-समय पर देखने को मिलती रही है। ऐसे हालात में किसी अधिकारी का अचानक किया गया स्थानांतरण अक्सर विवाद और बहस का कारण बन जाता है, जिसका असर स्थानीय शासन व्यवस्था पर भी पड़ सकता है. दूसरी ओर, इस बदलाव की खबर सामने आने के बाद इलाके के अनेक नागरिकों ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
कई लोगों का कहना है कि जिस अधिकारी ने जिले में सख्ती और ईमानदारी से काम किया, उसे अचानक हटाया जाना उचित नहीं है। कुछ लोगों ने यह भी मांग की है कि ऐसे अधिकारियों को कार्य करने के लिए पर्याप्त समय और समर्थन दिया जाना चाहिए।
ये भी पढ़े – जमीन में भी आईटी का खेल, रिटायर्ड अधिकारी और कंपनी पर बढ़ीं चर्चाएं
- bhopal-ips-officer-transfer-bureaucracy-politics-uproar









