
सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद में बदल गया है। वन विकास निगम की कार्रवाई में बारेला आदिवासी समुदाय के 12 परिवारों के मकान तोड़े जाने, खेतों में खड़ी फसल नष्ट होने और पानी के लिए इस्तेमाल होने वाले कुएं को मिट्टी से भरने की बात सामने आई है। मामले की जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान मौके पर पहुंचे और कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई।
वन विकास निगम ने क्यों की कार्रवाई?
वन विकास निगम और प्रशासन की ओर से कार्रवाई को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई बताया गया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य वन विकास निगम का कहना है कि संबंधित क्षेत्र में वर्ष 2021 में प्लांटेशन कराया गया था। आरोप है कि कुछ आदिवासी परिवारों ने प्लांटेशन को नष्ट कर वहां खेती शुरू कर दी और झोपड़ियां बना लीं। निगम के मुताबिक, संबंधित परिवारों के खिलाफ वन अपराध के मामले दर्ज थे और उन्हें बेदखली के नोटिस भी दिए गए थे। इसके बाद कथित अवैध झोपड़ियों को हटाने की कार्रवाई की गई।
कार्रवाई के दौरान मकानों के साथ मक्का और तुअर की फसल को नुकसान पहुंचने तथा एक कुएं को मिट्टी से भरने की बात भी सामने आई है। इससे प्रभावित परिवारों के सामने आवास, आजीविका और पानी की समस्या खड़ी होने की रिपोर्ट है।
शिवराज सिंह चौहान क्यों हुए नाराज?
कोसमी अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा और बुधनी विधानसभा क्षेत्र में आता है, जिसका लंबे समय तक शिवराज सिंह चौहान प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद वे रविवार को प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे। उन्होंने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही अधिकारियों से आदिवासी परिवारों के घर नहीं गिराने को लेकर बात की थी। इसके बावजूद कार्रवाई होने पर उन्होंने नाराजगी जताई।
शिवराज ने मौके से मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से फोन पर बात की। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से भी मामले पर चर्चा करने की बात कही। शिवराज ने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिया कि उनके लिए नए पक्के मकान बनवाए जाएंगे और स्थायी व्यवस्था होने तक रहने-खाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
यह भी पढ़े: Navratri 2026 दूसरा दिन, आज मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें शुभ रंग, भोग, मंत्र और पूजा विधि
आदिवासी परिवारों के सामने क्या संकट?
मकान टूटने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है। खेतों में खड़ी फसल के नुकसान से उनकी आय प्रभावित होने की बात भी सामने आई है। वहीं कुआं भर दिए जाने के आरोप के कारण पेयजल और सिंचाई को लेकर भी परेशानी बताई गई है।
शिवराज ने इस कार्रवाई को गरीब परिवारों के साथ अन्याय बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही है। वहीं वन विकास निगम की ओर से इसे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई बताया गया है। ऐसे में पूरे मामले में अब प्रशासन की आगे की कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को मिलने वाली राहत महत्वपूर्ण होगी।
कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा
कोसमी मामले को लेकर कांग्रेस ने भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि आदिवासी परिवारों को सरकार के भीतर चल रही कथित खींचतान का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से इस मामले में स्पष्ट जवाब और ठोस कार्रवाई की मांग की।
फिलहाल कोसमी में हुई कार्रवाई के बाद वन विकास निगम, प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व के रुख पर नजर है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन परिवारों के मकान टूटे हैं, उन्हें स्थायी आवास और तत्काल राहत कब तक मिलती है।
यह भी पढ़े: Navratri 2026, नवरात्रि का पहला दिन आज, जानें मां शैलपुत्री की पूजा, मंत्र और भोग
- budhni-kosmi-tribal-houses-demolition-shivraj-chouhan-government








