अंधेर नगरी, चौपट राजा: वल्लभ भवन से ‘मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान’ में करोड़ों का महाघोटाला; डॉ. अरविंद यादव और भ्रष्ट तंत्र ने इंसानियत को किया तार-तार!

कैंसर और गंभीर मरीजों के हक के पैसे पर डाका; खातेगांव के दिव्या नर्सिंग होमका लाइव फोटो स्कैम उजागर, ‘ब्रांडवाणीखोलता रहेगा इन मलाईखोरों के राज!

भोपाल/खातेगांव: मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारे ‘वल्लभ भवन’ की नाक के नीचे भ्रष्टाचार का एक ऐसा घिनौना खेल चल रहा है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। गरीबों, लाचारों और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों से जूझ रहे पीड़ितों की मदद के लिए बनी ‘मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान’ योजना को भ्रष्ट अधिकारियों और निजी अस्पतालों के गठजोड़ ने अपनी अवैध कमाई का जरिया बना लिया है। ‘अंधेर नगरी, चौपट राजा’ की कहावत को चरितार्थ करते हुए इस महाघोटाले के मुख्य सूत्रधार डॉ. अरविंद यादव और उनके सहयोगी वल्लभ भवन में बैठकर करोड़ों-अरबों का वारा-न्यारा कर रहे हैं, और सरकार चैन की नींद सो रही है।

‘ब्रांडवाणी समाचार’ के हाथ लगे पुख्ता सबूतों और वीडियो ने इस पूरे सिंडिकेट की पोल खोलकर रख दी है। देवास जिले के खातेगांव ब्लॉक में स्थित ‘दिव्या नर्सिंग होम’ (अजनास रोड, शंख मंदिर के सामने) में यह फर्जीवाड़ा खुलेआम चल रहा है।

गाँव के ही एक सीधे-साधे युवक रघुनाथ पिता श्री जहरीनाथ ने अपनी आपबीती सुनाते हुए इस काले धंधे को बेनकाब किया। रघुनाथ को प्रलोभन दिया गया था कि अस्पताल में मात्र 5 मिनट के लिए आने, शरीर पर नकली मेडिकल चिप (इलेक्ट्रोड) लगवाने और एक रंगीन ड्रिप चढ़वाने के बदले उसे ₹1,000 नकद दिए जाएंगे। रघुनाथ जैसे कई गरीब युवाओं को बिना किसी बीमारी के अस्पताल के बेड पर लिटाया जाता है और जीपीएस मैप कैमरे से ‘लाइव फोटो’ खींचकर वल्लभ भवन भेजी जाती है।

इसके बाद, मुख्यमंत्री कार्यालय के नाम से आधिकारिक संदेश आता है कि आवेदक रघुनाथ का आवेदन पत्र मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान के अंतर्गत स्वीकृत किया गया है, जिसकी राशि ₹10,000 है।” खेल यहीं खत्म नहीं होता; अस्पताल प्रबंधन इस ₹10,000 की स्वीकृत राशि में से मरीज को सिर्फ ₹1,000 थमा देता है और बाकी के ₹9,000 डॉ. अरविंद यादव और अस्पताल माफिया की जेब में चले जाते हैं। रोजाना ऐसे न जाने कितने फर्जी केस बनाकर सरकार की तिजोरी को लूटा जा रहा है।

मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव जो दिन-रात प्रदेश में जीरो टॉलरेंस और ईमानदारी का ढिंढोरा पीटते हैं, क्या उनकी आँखों पर पट्टी बंधी हुई है? वल्लभ भवन में बैठे बड़े साहबों को यह अरबों का खेल क्यों नहीं दिखता? जब कोई इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने या काम के सिलसिले में इन अधिकारियों के पास जाता है, तो ये ऐसे बर्ताव करते हैं जैसे कोई दुश्मनी हो। जनता और प्रदेश के हित से इन्हें कोई सरोकार नहीं है; इन्हें मतलब है तो सिर्फ अपनी जेबें गर्म करने से। ये अधिकारी मीडिया और जनता के फोन नंबर ब्लॉक कर देते हैं और मिलने से साफ मना कर देते हैं।

ब्रांडवाणी की हुंकार, न दलाली की, न करेंगे!

‘ब्रांडवाणी समाचार’ इस महाघोटाले को लगातार प्रमुखता से दिखाता आ रहा है। हम पूरी ठसक के साथ यह साफ कर देना चाहते हैं—ब्रांडवाणी समाचार न तो किसी की दलाली करता है और न ही हमें किसी दलाली से कोई वास्ता है! हम जो लिखते हैं, सत्य लिखते हैं, सही लिखते हैं और समाज के हित में लिखते हैं।

वल्लभ भवन में बैठकर खुद को खुदा समझने वाले ये मलाईखोर अधिकारी कान खोलकर सुन लें—जब तक जनता के हक पर डाका पड़ता रहेगा, ब्रांडवाणी की कलम चलती रहेगी। सबके राज खुलेंगे, सबके चेहरों से नकाब उतरेंगे और इन भ्रष्टाचारियों को उनकी सही औकात पता चल कर रहेगी!

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gaurav singh rajput

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