
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गाजा में जारी संघर्ष को लेकर केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए तीखा बयान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि गाजा में बच्चों को खत्म करने की कोशिश की जा रही है और इस मानवीय संकट पर भारत ने अपेक्षित रूप से मुखर रुख नहीं अपनाया। सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि दुनिया के कई देश इजराइल की सैन्य कार्रवाई को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर रहे हैं, जबकि भारत का रुख अलग दिखाई दे रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब गाजा की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बहस जारी है।
सोनिया गांधी ने अपने बयान में दावा किया कि वैश्विक स्तर पर कई देश इजराइल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना कर रहे हैं और युद्धविराम तथा मानवीय सहायता की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार, भारत की विदेश नीति ऐतिहासिक रूप से शांति, संवाद और संतुलन पर आधारित रही है, इसलिए मौजूदा परिस्थितियों में सरकार का रुख भी उसी परंपरा के अनुरूप होना चाहिए। यह टिप्पणी कांग्रेस की राजनीतिक आलोचना का हिस्सा है और इसे उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
वहीं, केंद्र सरकार का आधिकारिक रुख यह रहा है कि भारत आतंकवाद की निंदा करता है, नागरिकों की सुरक्षा का समर्थन करता है और साथ ही गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाने तथा संवाद के माध्यम से समाधान की वकालत करता है। भारत ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंसा कम करने, बंधकों की रिहाई और मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति पर भी जोर दिया है। विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद पहले भी देखने को मिले हैं, विशेषकर मध्य-पूर्व जैसे संवेदनशील विषयों पर।
गाजा संघर्ष को लेकर देश की राजनीति में भी बहस तेज हो गई है। एक ओर विपक्ष सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर सरकार अपने रुख को राष्ट्रीय हितों, रणनीतिक संबंधों और मानवीय दृष्टिकोण के संतुलन पर आधारित बता रही है। आने वाले समय में संसद और राजनीतिक मंचों पर इस मुद्दे पर चर्चा और तेज होने की संभावना है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गाजा संकट और उसके समाधान को लेकर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।
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