
सीहोर: बुधनी जनपद के हरित वादियों में स्थित जोशीपुर गांव का गुंजारी नर्मदा संगम घाट आज एक बार फिर जनसेवा और संवेदनशीलता का अभूतपूर्व उदाहरण बना। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने घाट पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
मंत्री श्री पटेल जब घाट पर पहुंचे, तो नर्मदा के शांत प्रवाह के बीच वातावरण में एक विशेष ऊर्जा का संचार हुआ। उन्होंने संगम स्थल पर चल रहे स्वच्छता एवं संरक्षण कार्यों का सूक्ष्म अवलोकन किया और व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मंत्री की विशेष पहल
निरीक्षण के दौरान श्री पटेल ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने घाट की स्वच्छता, जल की गुणवत्ता एवं उपलब्ध सुविधाओं पर संतोष व्यक्त किया और भविष्य की संभावनाओं को रेखांकित किया। मंत्री ने कहा कि गुंजारी संगम घाट के संपूर्ण ढांचे को सुदृढ़ एवं आकर्षक बनाया जाएगा। मंदिर के विकास के लिए भी विशेष कार्य किए जाएंगे जिससे यह स्थल आस्था, पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र बन सके।
जनसमूह के लिए प्रेरणादायक शब्द
इस अवसर पर मंत्री श्री पटेल ने भावुकता से कहा, “माँ नर्मदा ने हमें सदैव जीवन, आस्था और समृद्धि दी है। अब यह हमारा कर्तव्य है कि हम उन्हें स्वच्छता, संरक्षण और सम्मान के रूप में कुछ लौटाएं।” उनके ये शब्द उपस्थित जनसमूह के लिए एक प्रेरणादायक जनआह्वान बन गए।
जनआंदोलन की दिशा में कदम
मंत्री श्री पटेल ने ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ को एक निरंतर चलने वाला जनआंदोलन बताते हुए कहा कि यह प्रयास किसी एक दिन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को निर्देशित किया कि संगम स्थलों की स्वच्छता, सौंदर्यीकरण एवं संरक्षण के कार्य नियमित रूप से जारी रखें।
उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की कि वे जल स्रोतों को स्वच्छ बनाए रखने में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि नदियाँ केवल जलधाराएं नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता और संस्कृति की जीवनरेखा हैं, जिनकी पवित्रता बनाए रखना हम सभी का साझा दायित्व है।
उल्लेखनीय है कि मंत्री श्री पटेल इससे पूर्व भी इस स्थल पर स्वयं स्वच्छता कार्य में सहभागी बन चुके हैं। उस समय उन्होंने जनभागीदारी का जो संदेश दिया था, आज के पुनः निरीक्षण ने उसे और अधिक सशक्त किया है।
प्रकृति के प्रति कृतज्ञता
गुंजारी संगम घाट पर आज का यह निरीक्षण एक प्रशासनिक गतिविधि से कहीं अधिक रहा—यह प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, संस्कृति के प्रति समर्पण और समाज के प्रति जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण बन गया। यहां बहती नर्मदा की धारा मानो इस संकल्प की साक्षी बन, आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित भविष्य की कामना कर रही हो।
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