अगरा में स्वीकृत बिजली सबस्टेशन शिफ्ट करने की चर्चा से ग्रामीणों में रोष, कलेक्टर से जांच की मांग

गुना/ मोहित सोनी: ग्राम पंचायत अगरा में स्वीकृत 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र और उससे जुड़े फीडर को कथित तौर पर किसी दूसरे स्थान पर शिफ्ट किए जाने की सुगबुगाहट ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से क्षेत्र की बिजली समस्या को दूर करने के लिए प्रस्तावित सबस्टेशन को लेकर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। ऐसे में अब स्थान परिवर्तन या परियोजना निरस्त किए जाने की चर्चा से ग्रामीणों में भारी असंतोष है।

मामले को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्टर के नाम आवेदन सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि सबस्टेशन को शिफ्ट करने की तैयारी है तो इसके पीछे का कारण स्पष्ट किया जाए और पूर्व निर्धारित स्थान ग्राम अगरा में ही निर्माण कार्य पूरा कराया जाए।

पूर्व मंत्री ने किया था भूमि पूजन

ग्रामीणों के मुताबिक, क्षेत्र में लगातार बनी रहने वाली बिजली की समस्या को देखते हुए ग्राम अगरा में 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र स्वीकृत किया गया था। इस परियोजना का भूमि पूजन पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया द्वारा किए जाने की बात ग्रामीणों ने अपने आवेदन में कही है।

ग्रामीणों का कहना है कि सबस्टेशन बनने के बाद केवल अगरा ही नहीं, बल्कि आसपास के करीब 7 से 8 गांवों को बिजली आपूर्ति में राहत मिलने की उम्मीद थी। परियोजना को क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण योजना के तौर पर देखा जा रहा था।

सबस्टेशन के लिए जमीन के चयन से जुड़ी प्रक्रिया भी पूरी होने की जानकारी ग्रामीणों ने दी है। उनके अनुसार राजस्व विभाग, तहसील, एसडीएम और वन विभाग सहित संबंधित स्तरों पर जमीन चयन को लेकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा चुकी थी।

टेंडर के बाद शुरू हो चुका था काम

ग्रामीणों ने कलेक्टर को दिए आवेदन में बताया कि परियोजना का टेंडर भी हो चुका है और इसके बाद विद्युत लाइन से संबंधित काम आगे बढ़ाया गया। भदौरा से अगरा तक करीब 80 बिजली के खंभे लगाए जाने थे।

ग्रामीणों के अनुसार इनमें से लगभग 20 बिजली के खंभे जमीन में गाड़े भी जा चुके हैं। ऐसे में अब अचानक सबस्टेशन को किसी दूसरे स्थान पर ले जाने की चर्चा ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जब परियोजना को लेकर स्वीकृति, भूमि चयन और टेंडर जैसी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं तथा मौके पर काम भी शुरू हो गया है, तो फिर स्थान परिवर्तन की जरूरत क्यों पड़ रही है, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

लिखित आदेश नहीं मिलने से बढ़ा भ्रम

ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि सबस्टेशन को निरस्त करने या दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने को लेकर उन्हें अभी तक कोई स्पष्ट लिखित आदेश या आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। इसके बावजूद क्षेत्र में इस तरह की चर्चाएं तेजी से फैल रही हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि वास्तव में सबस्टेशन का स्थान बदला जा रहा है तो प्रशासन और संबंधित बिजली विभाग को इसकी वजह स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं अगर ऐसी कोई योजना नहीं है तो विभाग को स्थिति साफ करते हुए ग्रामीणों को जानकारी देनी चाहिए, ताकि क्षेत्र में बना भ्रम समाप्त हो सके।

व्यक्ति विशेष के हस्तक्षेप की भी जताई आशंका

ज्ञापन में ग्रामीणों ने किसी व्यक्ति विशेष के हस्तक्षेप की आशंका भी जताई है। हालांकि इस संबंध में लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि स्वीकृत परियोजना के स्थान में बदलाव की कोई प्रक्रिया चल रही है या नहीं और यदि चल रही है तो उसका आधार क्या है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी दबाव या अनुचित हस्तक्षेप के कारण सबस्टेशन को पूर्व निर्धारित स्थान से हटाया जाता है तो इससे क्षेत्र के 7-8 गांवों को मिलने वाली बिजली सुविधा प्रभावित हो सकती है।

सरकारी खर्च और संसाधनों के नुकसान का भी सवाल

ग्रामीणों ने इस मामले में अब तक हुए सरकारी खर्च और मौके पर लगाए गए बिजली के खंभों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब परियोजना के तहत काम शुरू हो चुका है और करीब 20 खंभे जमीन में लगाए जा चुके हैं, तो स्थान परिवर्तन की स्थिति में इन संसाधनों का क्या होगा, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।

उनका तर्क है कि यदि बिना ठोस कारण के परियोजना का स्थान बदला गया तो पहले से किए गए काम पर खर्च हुई राशि और संसाधनों का नुकसान हो सकता है। ऐसे में किसी भी निर्णय से पहले पूरे मामले की जांच जरूरी है।

पूर्व स्वीकृत स्थल पर ही निर्माण की मांग

ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सबस्टेशन को शिफ्ट करने की चर्चाओं की वास्तविकता सामने लाई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि परियोजना के लिए पूर्व में निर्धारित जमीन को बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि ग्राम अगरा में पूर्व निर्धारित स्थल पर ही 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र का निर्माण पूरा कराया जाए, ताकि अगरा सहित आसपास के 7-8 गांवों को बेहतर बिजली आपूर्ति का लाभ मिल सके।

फिलहाल ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपना पक्ष रख दिया है और अब उन्हें मामले में जांच तथा स्पष्ट कार्रवाई का इंतजार है।

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Manisha Gupta

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