
गुना/ मोहित सोनी: प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने और पुलिस से मदद नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए एक गंभीर रूप से बीमार बुजुर्ग ने अब जिला कलेक्टर के सामने न्याय की गुहार लगाई है। मामला गुना का है, जहां 60 वर्षीय पूनमचंद कसेरा ने जनसुनवाई में पहुंचकर अपनी दुकान और संपत्ति पर कथित कब्जे की शिकायत की। बुजुर्ग का कहना है कि वह पहले पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
कलेक्ट्रेट में दिए आवेदन में उन्होंने आरोप लगाया कि बीमारी के दौरान जिस भतीजे पर भरोसा कर दुकान की जिम्मेदारी सौंपी थी, उसी ने कथित तौर पर दुकान पर कब्जा कर लिया। पीड़ित ने प्रशासन से दुकान वापस दिलाने, मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
बीमारी के दौरान भतीजे को सौंपी थी दुकान की जिम्मेदारी
पूनमचंद कसेरा के मुताबिक, वे लंबे समय से लकवे की बीमारी से जूझ रहे हैं। इलाज के दौरान उन्होंने भरोसा करते हुए अपनी दुकान की जिम्मेदारी अपने भतीजे को संभालने के लिए दी थी। उनका आरोप है कि बीमारी से उबरकर जब वे वापस लौटे तो भतीजे ने दुकान का हिसाब देने से इनकार कर दिया।
बुजुर्ग का आरोप है कि दुकान पर अपना अधिकार जताने पर उनके साथ मारपीट की गई और दुकान की चाबियां भी छीन ली गईं। इसके बाद उनकी दुकान पर कथित तौर पर कब्जा कर लिया गया। पीड़ित का कहना है कि दुकान उनकी आजीविका का प्रमुख साधन थी और उसके हाथ से निकल जाने के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
थाने में शिकायत की तो कार्रवाई न होने का आरोप
पीड़ित ने अपने आवेदन में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि दुकान पर कब्जे और मारपीट की शिकायत लेकर जब वे सिटी कोतवाली पहुंचे तो उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
बुजुर्ग का आरोप है कि उन्हें थाने से बाहर जाने के लिए कहा गया और उल्टे झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई। हालांकि पुलिस की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत के बाद भी राहत नहीं मिलने पर अब बुजुर्ग ने कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में अपनी बात रखी है।
दुकान छिनी तो रोजी-रोटी का संकट
पूनमचंद कसेरा का कहना है कि दुकान ही उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख सहारा थी। बीमारी के चलते पहले ही आर्थिक और शारीरिक परेशानियों से जूझ रहे बुजुर्ग के लिए दुकान पर कब्जे की स्थिति ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
उनके मुताबिक, इलाज का खर्च लगातार बना हुआ है। इसके अलावा परिवार में चार बेटियों की शादी की जिम्मेदारी भी है। ऐसे में दुकान पर कब्जे के कारण आय का साधन बंद होने से परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया है।
बुजुर्ग का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्या के समाधान के लिए पुलिस और प्रशासन के स्तर पर कई बार गुहार लगाई, लेकिन अब तक उन्हें राहत नहीं मिल सकी।
कलेक्टर से एफआईआर और संपत्ति वापस दिलाने की मांग
जनसुनवाई में दिए आवेदन के जरिए पीड़ित ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ शिकायत की जांच कर एफआईआर दर्ज कराने और दुकान व संपत्ति का कब्जा वापस दिलाने की मांग रखी है।
पूनमचंद का कहना है कि यदि उनकी शिकायत सही पाई जाती है तो उन्हें उनकी संपत्ति पर दोबारा अधिकार दिलाया जाए और उनके साथ हुई कथित मारपीट तथा धमकी के मामले में भी कार्रवाई की जाए।
‘साहब, या तो दुकान दिलाओ या इच्छा मृत्यु की इजाजत’
अपनी परेशानी बताते हुए बुजुर्ग ने प्रशासन के सामने बेहद भावुक अपील रखी। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें उनकी दुकान और संपत्ति वापस नहीं मिलती है तो परिवार के पास कोई रास्ता नहीं बचेगा। इसी निराशा में उन्होंने प्रशासन से परिवार को इच्छा मृत्यु की अनुमति देने तक की बात कही।
बुजुर्ग की इस अपील से उनकी आर्थिक और मानसिक परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि प्रशासन की ओर से इस मामले में क्या कार्रवाई की जाएगी, यह जांच और अधिकारियों के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर
पूनमचंद कसेरा ने कलेक्टर के सामने अपनी शिकायत रखकर मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब सवाल यह है कि जनसुनवाई में आवेदन मिलने के बाद जिला प्रशासन इस मामले को किस स्तर पर जांच के लिए भेजता है और पीड़ित को कितनी जल्दी राहत मिलती है।
फिलहाल बुजुर्ग परिवार को प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है। मामले में लगाए गए कब्जे, मारपीट और पुलिस द्वारा कार्रवाई न करने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ये भी पढ़े – टीकमगढ़ में युवासंगम मेले में 158 अभ्यर्थियों का प्राथमिक चयन, 3 का अप्रेन्टिसशिप के लिए चयन
- guna-elderly-man-property-dispute-collector-jansunwai-demand-action








