
देशभर में स्वच्छता के लिए पहचान बना चुके इंदौर के मॉडल को अब पश्चिम बंगाल में लागू करने की तैयारी है। इसी सिलसिले में पश्चिम बंगाल के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री दिलीप घोष अधिकारियों और विशेषज्ञों की टीम के साथ इंदौर पहुंचे। टीम ने शहर की सफाई व्यवस्था, घर-घर कचरा संग्रहण, कचरा अलग करने की प्रक्रिया और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम का बारीकी से अध्ययन किया।
कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से लेकर प्लांट तक देखा सिस्टम
बंगाल से आई टीम में आईआईटी के प्रोफेसर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इंजीनियर और अन्य अधिकारी शामिल रहे। टीम ने इंदौर के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का निरीक्षण किया और जाना कि तकनीक के माध्यम से शहर की सफाई व्यवस्था की निगरानी किस तरह की जाती है।
इसके अलावा अधिकारियों ने घर-घर से कचरा उठाने, गीले और सूखे कचरे के सेग्रीगेशन, कचरे के परिवहन और उसकी प्रोसेसिंग की पूरी प्रक्रिया को भी समझा।
‘स्वच्छता के मामले में बंगाल अभी पीछे’
पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने माना कि स्वच्छता के मामले में उनका राज्य इंदौर से काफी पीछे है। उन्होंने कहा कि इंदौर ने एक दिन में यह मुकाम हासिल नहीं किया, बल्कि कई वर्षों तक लगातार काम करके एक प्रभावी व्यवस्था तैयार की है।
उन्होंने बताया कि बंगाल की टीम यह समझने आई है कि इंदौर ने सफाई व्यवस्था को किस तरह विकसित किया और उसे लंबे समय से प्रभावी तरीके से कैसे संचालित किया जा रहा है।
कचरा संग्रहण से प्रोसेसिंग तक समझी व्यवस्था
टीम ने यह भी देखा कि इंदौर में कचरा घरों से निकलने के बाद किस तरह अलग-अलग किया जाता है, उसे निर्धारित स्थानों तक कैसे पहुंचाया जाता है और फिर किस प्रक्रिया से उसका निपटारा या प्रोसेसिंग होती है।
अधिकारियों ने सफाई व्यवस्था की मॉनिटरिंग और कचरा प्रबंधन से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जानकारी भी ली। बंगाल की टीम दो से तीन दिन इंदौर में रहकर शहर की स्वच्छता व्यवस्था का विस्तृत अध्ययन करेगी।
बंगाल में चरणबद्ध तरीके से लागू होगा मॉडल
मंत्री घोष ने संकेत दिया कि इंदौर की व्यवस्था को पश्चिम बंगाल की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपनाने की कोशिश की जाएगी। उनका कहना है कि राज्य में कुछ व्यवस्थाएं पहले से मौजूद हैं, लेकिन उन्हें और प्रभावी बनाने की जरूरत है।
इंदौर के दौरे का उद्देश्य सिर्फ सफाई अभियान को समझना नहीं, बल्कि इसके पीछे काम कर रहे पूरे सिस्टम कचरा संग्रहण, सेग्रीगेशन, परिवहन, प्रोसेसिंग और मॉनिटरिंग को समझना है। इसी आधार पर पश्चिम बंगाल में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है।
इंदौर के लिए बड़ी उपलब्धि
पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्य की टीम का इंदौर पहुंचकर यहां की सफाई व्यवस्था का अध्ययन करना शहर के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इंदौर ने स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित रखने के बजाय कचरा प्रबंधन और निगरानी की पूरी व्यवस्था विकसित की है।
अब बंगाल की टीम इसी मॉडल की बारीकियों को समझकर अपने शहरों में लागू करने की दिशा में काम करेगी। इससे इंदौर का स्वच्छता मॉडल देश के दूसरे राज्यों के लिए भी एक उदाहरण के रूप में सामने आ रहा है।
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