
महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अब बड़ा मुद्दा बन गया है। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने साफ संकेत दिया है कि महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चलाने वाले ड्राइवरों के लिए मराठी का कामकाजी ज्ञान जरूरी होगा। नियमों का पालन नहीं करने वाले चालकों के खिलाफ लाइसेंस संबंधी कार्रवाई की जा सकती है।
15 अगस्त तक दी गई थी मराठी सीखने की मोहलत
दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने पहले इस नियम को लागू करने के लिए ऑटो और टैक्सी चालकों को समय दिया था। अप्रैल में परिवहन विभाग की ओर से 1 मई से विशेष वेरिफिकेशन अभियान चलाने की बात कही गई थी। यह अभियान राज्य के 59 क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों के माध्यम से चलाया जाना था। बाद में ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए 15 अगस्त तक की मोहलत दी गई।
उस समय सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया था कि केवल मराठी न जानने की वजह से अभियान के दौरान तुरंत लाइसेंस रद्द नहीं किए जाएंगे। चालकों को भाषा सीखने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया था। अब 15 अगस्त की समय-सीमा बीतने के बाद इस मुद्दे पर सरकार का रुख पहले से ज्यादा सख्त नजर आ रहा है।
क्या है सरकार का तर्क?
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक का कहना है कि महाराष्ट्र में व्यवसाय या सार्वजनिक परिवहन सेवा देने वाले लोगों को स्थानीय भाषा का ज्ञान होना चाहिए। सरकार के अनुसार, ऑटो और टैक्सी चालक सीधे यात्रियों के संपर्क में रहते हैं, इसलिए उन्हें यात्रियों से मराठी में बुनियादी बातचीत करने में सक्षम होना चाहिए।
सरकार इसे सिर्फ भाषा का मुद्दा नहीं बल्कि यात्रियों और ड्राइवरों के बीच बेहतर संवाद से भी जोड़ रही है। कामकाजी मराठी आने से यात्रियों को अपनी बात समझाने और ड्राइवरों को निर्देश समझने में आसानी होने का तर्क दिया जा रहा है।
पहले भी हुआ था विवाद
मराठी को अनिवार्य किए जाने का मुद्दा नया नहीं है। अप्रैल में जब सरकार ने ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी पढ़ने-लिखने की क्षमता को लेकर जांच की बात कही थी, तभी राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस शुरू हो गई थी।
कुछ ऑटो-टैक्सी यूनियनों ने इस फैसले का विरोध किया था। वहीं, कुछ चालकों ने कहा था कि महाराष्ट्र में काम करने वालों को मराठी सीखना चाहिए, लेकिन उन्हें भाषा सीखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। कई गैर-मराठी चालकों ने मराठी सीखने के लिए कोचिंग क्लास तक ज्वाइन करनी शुरू कर दी थी।
लाइसेंस पर कितनी बड़ी कार्रवाई होगी?
अगस्त में सामने आए नए बयान के मुताबिक, मराठी का कामकाजी ज्ञान नहीं रखने वाले ऑटो-टैक्सी चालकों पर लाइसेंस संबंधी कार्रवाई की जा सकती है। कुछ रिपोर्टों में लाइसेंस निलंबन से लेकर रद्द किए जाने तक की बात सामने आई है।
हालांकि, अप्रैल में सरकार ने यह स्पष्ट किया था कि वेरिफिकेशन अभियान के दौरान सिर्फ भाषा न जानने के आधार पर तत्काल लाइसेंस रद्द नहीं किया जाएगा। इसलिए अब वास्तविक कार्रवाई किस प्रक्रिया और किस स्तर पर होगी, यह परिवहन विभाग के लागू नियमों और आगे जारी होने वाले निर्देशों पर निर्भर करेगा।
मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में असर
इस फैसले का असर मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और अन्य स्थानीय परिवहन सेवाओं से जुड़े चालकों पर पड़ सकता है। खासकर उन ड्राइवरों के लिए यह बड़ा बदलाव है, जो लंबे समय से राज्य में रहकर काम कर रहे हैं लेकिन मराठी में पढ़ने-लिखने या बातचीत करने में सहज नहीं हैं।
अब देखना होगा कि परिवहन विभाग भाषा के ज्ञान की जांच किस तरीके से करता है और नियमों का पालन नहीं करने वाले चालकों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की जाती है। फिलहाल सरकार के सख्त रुख ने ऑटो-टैक्सी सेक्टर में एक बार फिर मराठी भाषा को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
- Maharashtra-auto-taxi-drivers-marathi-language-mandatory-license-action








