
मैहर: नेशनल हाईवे-30 करोड़ों का बजट, बड़े-बड़े वादे और विकास के चमचमाते नारे—लेकिन मैहर की हरनामपुर सर्विस रोड पर उतरते ही ये सारे दावे धूल में मिलते नजर आते हैं। NH-30 की यह सर्विस रोड आज राहगीरों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि ‘सफर-ए-सजा’ बन चुकी है। कांग्रेस नगर अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी ने इस बदहाली पर तीखा प्रहार करते हुए सीधे सरकार की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
धूल का गुबार और सांसों पर पहरा
हरनामपुर सर्विस रोड की स्थिति वर्तमान में किसी गैस चैंबर से कम नहीं है। भारी ट्रकों और टैंकरों के गुजरते ही यहां धूल का ऐसा गुबार उठता है कि सामने का रास्ता दिखना बंद हो जाता है। स्थानीय रहवासी न केवल दुर्घटनाओं के साये में जी रहे हैं, बल्कि उड़ती धूल के कारण सांस संबंधी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। पैदल चलने वालों के लिए तो यह मार्ग अब एक ‘अग्निपरीक्षा’ बन चुका है।
“जनता को गड्ढे और ठेकेदारों को मुनाफा?” – प्रभात द्विवेदी
सरकार पर हमला बोलते हुए नगर अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी ने दो टूक कहा कि अगर जनता को नरकीय जीवन देना ही विकास है, तो ऐसा विकास क्षेत्रवासियों के लिए अभिशाप है। उन्होंने निर्माण और रखरखाव में बरती गई लापरवाही को लेकर संबंधित विभागों की नीयत पर भी सवाल उठाए हैं।
सबसे बड़ा सवाल: जब सड़क नहीं, तो ‘टोल’ किस बात का?
इस पूरे मामले में सबसे विवादित पहलू टोल वसूली का है। द्विवेदी ने पुरजोर तरीके से मांग उठाई है कि:
“एक तरफ जनता जान जोखिम में डालकर गड्ढों और प्रदूषण के बीच सफर कर रही है, और दूसरी तरफ उनसे भारी-भरकम टोल वसूला जा रहा है। यह सीधे तौर पर जनता की जेब पर डाका है। जब तक सड़क दुरुस्त नहीं होती, टोल वसूली तुरंत बंद होनी चाहिए।”
प्रशासन को अल्टीमेटम: अब बहाने नहीं, समाधान चाहिए
कांग्रेस ने जिला प्रशासन और नेशनल हाईवे अथॉरिटी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। मुख्य मांगें स्पष्ट हैं:
तत्काल पुनर्निर्माण: कागजों पर नहीं, जमीन पर सड़क सुधारी जाए।
प्रदूषण नियंत्रण: सड़क पर नियमित पानी का छिड़काव हो ताकि जनता को धूल से राहत मिले।
यातायात प्रबंधन: भारी वाहनों के दबाव को नियंत्रित किया जाए।
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