
मैहर में केजेएस सीमेंट उद्योग की रेलवे साइडिंग में फ्लाई ऐश उतारे जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया गया है कि फ्लाई ऐश के परिवहन और अनलोडिंग के दौरान पर्यावरणीय तथा प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी जरूरी व्यवस्थाओं का पालन नहीं किया गया। मामले में संबंधित अनुमति, धूल नियंत्रण व्यवस्था और रेलवे साइडिंग की सुरक्षा को लेकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की जा रही है।
हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों से यह पुष्टि नहीं होती कि हाल में उतारी गई फ्लाई ऐश के लिए कोई वैध अनुमति नहीं थी। इसलिए इस मामले में संबंधित विभागों के रिकॉर्ड और मौके की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
रिहायशी इलाके और रेलवे स्टेशन की नजदीकी पर चिंता
स्थानीय लोगों का दावा है कि रेलवे साइडिंग के आसपास रिहायशी क्षेत्र है और रेलवे स्टेशन भी अपेक्षाकृत नजदीक है। ऐसे में फ्लाई ऐश, कोयला, जिप्सम या अन्य धूल पैदा करने वाली सामग्री की लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान प्रदूषण नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम होना जरूरी है।
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठाया गया है कि साइडिंग में धूल को नियंत्रित करने के लिए स्प्रिंकलर सिस्टम लगाया गया है, लेकिन उसकी विद्युत व्यवस्था को लेकर कथित तौर पर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इसकी वास्तविक स्थिति का तकनीकी निरीक्षण संबंधित विभाग ही कर सकता है।
KJS की परियोजना में रेलवे साइडिंग का उल्लेख
पर्यावरणीय दस्तावेजों में KJS Cement की अमिलिया, मैहर स्थित परियोजना और प्रस्तावित रेलवे साइडिंग का उल्लेख मिलता है। EIA दस्तावेज में पर्यावरणीय निगरानी के तहत वायु गुणवत्ता, उत्सर्जन और अन्य मानकों की निगरानी की बात कही गई है। वहीं, उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड में भी KJS Cement की निजी रेलवे साइडिंग और उसके निर्माण के लिए रेलवे से मिली मंजूरियों का उल्लेख है। 2025 के मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में रेलवे बोर्ड द्वारा निजी साइडिंग के निर्माण के लिए दी गई मंजूरी का जिक्र मिलता है।
इसलिए मौजूदा विवाद का मुख्य सवाल यह है कि संबंधित साइडिंग पर फ्लाई ऐश की मौजूदा खेप उतारने के लिए कौन-कौन सी विशिष्ट अनुमति और प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था लागू थी।
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धूल नियंत्रण व्यवस्था की हो जांच
फ्लाई ऐश के सुरक्षित संचालन के लिए धूल के फैलाव को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है। ऐसे में साइडिंग पर स्प्रिंकलर, पानी की उपलब्धता, विद्युत कनेक्शन, कवरिंग सिस्टम और अन्य प्रदूषण नियंत्रण उपायों की मौके पर जांच की मांग उठ रही है। केंद्रीय स्तर पर भी रेलवे के माध्यम से फ्लाई ऐश के परिवहन को बढ़ावा देने की पहल की गई है। सरकार के अनुसार फ्लाई ऐश को सीमेंट, सड़क और अन्य निर्माण कार्यों में उपयोग के लिए रेल नेटवर्क से पहुंचाना उद्देश्य है।
इसका मतलब यह है कि फ्लाई ऐश का रेल परिवहन अपने आप में प्रतिबंधित गतिविधि नहीं है, लेकिन उसके सुरक्षित संचालन और पर्यावरणीय मानकों का पालन महत्वपूर्ण है।
अनुमति और नियमों पर विभाग से जवाब की मांग
स्थानीय स्तर पर मांग की जा रही है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण विभाग और रेलवे के अधिकारी संयुक्त रूप से रेलवे साइडिंग का निरीक्षण करें। जांच में यह देखा जाए कि फ्लाई ऐश उतारने के लिए आवश्यक अनुमति मौजूद थी या नहीं और धूल नियंत्रण के सभी उपाय काम कर रहे थे या नहीं।
यदि जांच में नियमों का उल्लंघन मिलता है तो संबंधित एजेंसी या जिम्मेदार पक्ष के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि सभी अनुमतियां मौजूद हैं, तो विभाग को रिकॉर्ड सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। मैहर रेलवे साइडिंग में फ्लाई ऐश उतारने को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। खासकर रिहायशी क्षेत्र और रेलवे स्टेशन की मौजूदगी को देखते हुए धूल नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
फिलहाल उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि फ्लाई ऐश बिना पर्यावरणीय स्वीकृति या प्रदूषण विभाग की अनुमति के ही उतारी गई। इस दावे की पुष्टि संबंधित विभागों के दस्तावेज और मौके की जांच से ही हो सकेगी। अब देखना होगा कि प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस मामले में क्या जांच और कार्रवाई करते हैं।
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