
मुरैना/ महेंद्र सिंह लहरिया: जिला कलेक्टर कार्यालय के ठीक सामने बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टर ट्रॉलियों से खुलेआम खनिज सामग्री की बिक्री होने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रतिदिन सुबह गोपालपुरा रोड स्थित न्यू हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी चौराहे पर खंडा और गिट्टी से भरे ट्रैक्टर खड़े रहते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई के बजाय मौन बने हुए हैं। इस पूरे मामले ने प्रशासनिक निगरानी और नियमों के पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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स्थानीय लोगों के अनुसार गोपालपुरा रोड स्थित न्यू हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी चौराहे पर, जो कलेक्टर कार्यालय के ठीक सामने है, रोजाना सुबह बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टर ट्रॉली खनिज सामग्री बेचने के लिए खड़े दिखाई देते हैं। लोगों का कहना है कि यह कोई एक दो दिन की बात नहीं, बल्कि लंबे समय से लगातार जारी गतिविधि है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि यह पूरा कारोबार ऐसे स्थान पर संचालित हो रहा है, जहां से प्रशासनिक अधिकारियों का नियमित आना जाना रहता है।
बिना नंबर प्लेट वाहनों पर उठे सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बिना नंबर प्लेट के वाहन सार्वजनिक सड़कों पर कैसे संचालित हो रहे हैं। यदि वाहनों पर नंबर प्लेट नहीं है तो उनकी पहचान, पंजीयन और परिवहन की वैधता को लेकर भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमों का पालन आम नागरिकों के लिए अनिवार्य है तो ऐसे मामलों में भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।
खनिज परिवहन की वैधता जांचने की मांग
नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मौके पर जांच कर यह पता लगाया जाए कि खनिज सामग्री का परिवहन वैध अनुमति के तहत किया जा रहा है या नहीं। साथ ही संबंधित वाहनों के दस्तावेज, नंबर प्लेट, रॉयल्टी और परिवहन से जुड़े सभी आवश्यक अभिलेखों की भी जांच की जाए।
लोगों का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल
कलेक्टर कार्यालय के सामने ही कथित रूप से इस तरह की गतिविधियां होने से स्थानीय नागरिक प्रशासनिक निगरानी पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि संवेदनशील क्षेत्र में भी नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है तो अन्य स्थानों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन, अवैध खनिज परिवहन या संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
हालांकि, इस संबंध में खनिज विभाग, परिवहन विभाग या जिला प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आरोपों की पुष्टि संबंधित विभागों की जांच के बाद ही हो सकेगी।
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