सत्ता की देहरी पर गिरवी रखा ब्राह्मण स्वाभिमान?

अपनों की चुप्पी से आहत समाज: कुर्सी के मोह मेंमूकबधिरहुए समाज के तथाकथित रहनुमा

भोपाल/इंदौर। ब्राह्मण समाज, जिसे कभी राष्ट्र और समाज का मार्गदर्शक माना जाता था, आज अपने ही नेताओं की उपेक्षा और स्वार्थ की राजनीति का शिकार होकर हाशिए पर खड़ा है। विडंबना देखिए कि समाज ने जिन चेहरों को अपनी ताकत समझकर सत्ता के शीर्ष तक पहुँचाया, आज वही चेहरे अपनीकुर्सीऔरलालसाके लिए समाज के हितों का गला घोंट रहे हैं। मध्य प्रदेश की राजनीति में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला सहित कई ऐसे कद्दावर नाम हैं, जो समाज के दम पर पद तो पा गए, लेकिन जब समाज पर संकट आया या अन्याय हुआ, तो इनकी आवाज सत्ता के गलियारों में कहीं खो गई।

UGC के नियम और मूक नेतृत्व: योग्यता पर प्रहार, पर नेता मौन

हाल ही में UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) द्वारा जारी कुछ नियमों और आरक्षण संबंधी विसंगतियों ने ब्राह्मण मेधा और सामान्य वर्ग के छात्रों के भविष्य पर तलवार लटका दी है। जहाँ अन्य समाजों के नेता अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतर आते हैं, वहीं ब्राह्मण समाज के येशक्तिशालीनेता बंद कमरों में सरकार की जीहुजूरी में व्यस्त हैं।

     सवाल यह है: क्या इन नेताओं के लिए पद का मोह इतना बड़ा हो गया है कि इन्हें UGC की तानाशाही और समाज के युवाओं का भविष्य दिखाई नहीं देता?

     कड़वा सच: अपनी ही सरकार के सामने तीखी प्रतिक्रिया देना तो दूर, इन नेताओं ने कभी दबी आवाज में भी विरोध दर्ज नहीं कराया।

पद की लालसा और समाज का बहिष्कार

आरोप गंभीर हैं और जमीनी हकीकत भी यही बयां करती है। ब्राह्मण समाज के ये अधिकारी और नेता अपने छोटे से राजनीतिक लाभ के लिए अपने ही लोगों को दबाने में संकोच नहीं करते।

सत्ता का डर: सरकार में ऊँचे पदों पर बैठे ब्राह्मण नेता केवल इसलिए नहीं बोलते क्योंकि उन्हें डर है कि कहींआकानाराज हो जाएं और उनकी लाल बत्ती छिन जाए।

आंदोलन का अभाव: जब समाज पर अत्याचार होता है या ब्राह्मणों को निशाना बनाया जाता है, तो ये नेता आंदोलन करने के बजायशांति की अपीलका झुनझुना थमा देते हैं।

स्वार्थ की राजनीति: इतिहास गवाह है कि जबजब ब्राह्मण समाज ने नेतृत्व की उम्मीद की, इन नेताओं ने उसे केवल वोट बैंक समझा और काम निकल जाने के बाद समाज को अपनी ही नियति पर छोड़ दिया।

ब्राह्मण समाज का पतन बाहर वालों ने नहीं, बल्कि उनजयचंदोंने किया है जिन्होंने समाज के स्वाभिमान को सत्ता की मेज पर गिरवी रख दिया। राजेंद्र शुक्ला जैसे नेताओं की चुप्पी यह बताने के लिए काफी है कि उन्हें समाज के पसीने से ज्यादा अपनी कुर्सी की चमक प्यारी है।

समाज के प्रबुद्ध वर्ग की एक साझा राय

अब जागने का वक्त है

यदि आज भी ब्राह्मण समाज इनपदलोलुपनेताओं के भरोसे बैठा रहा, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें माफ नहीं करेंगी। UGC के काले नियमों और प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ अब समाज के आम व्यक्ति को खुद अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। जो नेता आपके हक के लिए अपनी सरकार से नहीं टकरा सकता, वह आपका प्रतिनिधि कहलाने के लायक नहीं है।

वक्त गया है कि सत्ता में बैठे इन मूक नायकों का बहिष्कार किया जाए और एक ऐसे नेतृत्व को खड़ा किया जाए जिसमें पद का लोभ नहीं, बल्कि समाज के प्रति समर्पण हो।

  • gaurav singh rajput

    gaurav singh rajput

    Related Posts

    अशोकनगर में हाई-प्रोफाइल ब्लैकमेल गैंग का पर्दाफाश; युवती से वसूले 1.30 करोड़, चांदी की चप्पल पहनती थी मास्टरमाइंड

    अशोकनगर/आदित्य शंकर तिवारी: मध्य प्रदेश के अशोकनगर की 21…

    आगे पढ़ें
    मैडम’ के तेवर पड़े ढीले: हाई-लेवल शिकायत के बाद बदली प्रामोटी IAS की कार्यशैली, अनुशासन में निपटा रहीं काम।

    अफ़सरशाही के गलियारों में इन दिनों एक ‘प्रामोटी आईएएस’…

    आगे पढ़ें

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    असम में घुसपैठ और कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा बोले-वादे शब्दों से नहीं, काम से पूरे होंगे

    असम में घुसपैठ और कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा बोले-वादे शब्दों से नहीं, काम से पूरे होंगे

    नॉर्वे के अखबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ, पीएम मोदी को बताया दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता

    नॉर्वे के अखबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ, पीएम मोदी को बताया दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता

    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पंजाब CM भगवंत मान की मुलाकात, कृषि सुधार और किसान कल्याण पर हुई अहम चर्चा

    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पंजाब CM भगवंत मान की मुलाकात, कृषि सुधार और किसान कल्याण पर हुई अहम चर्चा

    तमिलनाडु: बहुमत साबित करते ही विवादों में घिरी विजय सरकार, ज्योतिष की नियुक्ति का आदेश रद्द

    तमिलनाडु: बहुमत साबित करते ही विवादों में घिरी विजय सरकार, ज्योतिष की नियुक्ति का आदेश रद्द

    पुडुचेरी: एन. रंगासामी ने पांचवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, ‘सिंगापुर’ जैसा विकास करने का वादा

    पुडुचेरी: एन. रंगासामी ने पांचवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, ‘सिंगापुर’ जैसा विकास करने का वादा