मोहन कैबिनेट में बड़ी ‘सर्जरी’ की तैयारी: कैलाश-प्रह्लाद को मिल सकती है संगठन में नई कमान; दिल्ली में शाह से मुलाकातों ने बढ़ा दी है सियासी तपिश

भोपाल | विशेष संवाददाता मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों ‘दिल्ली की हलचल’ ने भोपाल का पारा चढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिल्ली दौरे और उसके ठीक बाद दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अलग-अलग मुलाकातों ने मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की अटकलों को हवा दे दी है। चर्चा है कि भाजपा हाईकमान अब इन दिग्गजों को सरकार से बाहर कर संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी में है।

3 बड़ी वजह: क्यों चर्चा में है सीनियर मंत्रियों की विदाई?

  1. कैबिनेट मीटिंग से दूरी: हाल ही में बड़वानी में हुई ‘कृषि कैबिनेट’ और उसके बाद भोपाल में हुई अहम बैठकों से विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल का नदारद रहना चर्चा का विषय बना हुआ है।
  2. संगठन का अनुभव: कैलाश विजयवर्गीय पहले भी राष्ट्रीय महासचिव के रूप में बंगाल जैसे राज्यों में भाजपा को मजबूत कर चुके हैं। वहीं, प्रह्लाद पटेल का लंबा संसदीय और केंद्रीय मंत्रालय का अनुभव है। आगामी राज्यों के चुनावों को देखते हुए इन्हें फिर से ‘चुनावी चाणक्य’ की भूमिका मिल सकती है।
  3. मंत्रिमंडल का संतुलन: मोहन सरकार में युवा चेहरों को आगे लाने और सीनियर-जूनियर के बीच सामंजस्य बिठाने के लिए एक ‘सर्जरी’ की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।

क्या नया होगा इस विस्तार में?

सूत्रों की मानें तो इस बार का मंत्रिमंडल विस्तार केवल खाली पद भरने के लिए नहीं होगा, बल्कि इसमें ‘परफॉर्मेंस’ के आधार पर बड़े बदलाव होंगे:

  • नए चेहरों की एंट्री: कुछ ऐसे विधायकों को मौका मिल सकता है जो लंबे समय से वेटिंग लिस्ट में हैं और संगठन के वफादार रहे हैं।
  • विभागों में फेरबदल: सीनियर मंत्रियों के हटने की स्थिति में नगरीय प्रशासन और पंचायत जैसे बड़े विभागों की जिम्मेदारी नए अनुभवी कंधों पर डाली जा सकती है।
  • जातीय समीकरण: मिशन 2028 और आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को फिर से साधा जाएगा।

भाजपा के एक वरिष्ठ सूत्र ने बताया “पार्टी अब ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के साथ-साथ ‘सही व्यक्ति, सही जगह’ के सिद्धांत पर काम कर रही है। कैलाश जी और प्रह्लाद जी जैसे नेताओं का कद राज्य कैबिनेट से कहीं बड़ा है। उन्हें राष्ट्रीय राजनीति या संगठन में वापस लाना पार्टी के लिए अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है।”

  • Shruti Soni

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