
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारी आयोग का पुनर्गठन कर दिया है। वित्त विभाग ने 13 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित की। इसके तहत सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी मलय श्रीवास्तव को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। आयोग में न्यायिक सेवा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
छह सदस्यों के साथ काम करेगा कर्मचारी आयोग
पुनर्गठित आयोग में अध्यक्ष के अलावा छह पदों पर जिम्मेदारियां तय की गई हैं। सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश अरुण कुमार सिंह को न्यायिक सेवा सदस्य बनाया गया है। सेवानिवृत्त कार्यालय अधीक्षक बादाम सिंह भी सदस्य होंगे। इसके अलावा पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा संचालनालय के संचालक को सदस्य का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग के सचिव स्तर के नामांकित अधिकारी भी आयोग में सदस्य के तौर पर शामिल रहेंगे। वित्त विभाग के सेवानिवृत्त उप सचिव अजय चौबे को आयोग का सचिव नियुक्त किया गया है।
कर्मचारियों के वेतनमान और पदनाम पर करेगा अध्ययन
राज्य कर्मचारी आयोग का मुख्य काम कर्मचारियों से जुड़े वेतनमान, पदनाम और सेवा संबंधी मामलों पर अध्ययन कर सरकार को सिफारिशें देना होगा। आयोग अपनी सिफारिश तैयार करते समय केंद्र सरकार और दूसरे राज्यों में समान संवर्ग के कर्मचारियों के वेतनमान और पदनाम का अध्ययन करेगा। इसके साथ ही मध्य प्रदेश की आर्थिक स्थिति, उपलब्ध वित्तीय संसाधन, लोक वित्त प्रबंधन और राज्य के आर्थिक विकास की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाएगा। आयोग अपने विचारणीय विषयों पर जरूरी जानकारी और दस्तावेज जुटा सकेगा।
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अभी वेतन बढ़ोतरी या एरियर का ऐलान नहीं
आयोग के पुनर्गठन को लेकर कर्मचारियों के बीच वेतन और सेवा संबंधी उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन फिलहाल सरकार के आदेश में किसी नए वेतनमान, वेतन वृद्धि, महंगाई भत्ते या एरियर की घोषणा नहीं की गई है। आयोग पहले संबंधित विषयों का अध्ययन करेगा और इसके बाद अपनी सिफारिशें शासन को सौंपेगा।
आयोग का कार्यकाल आगामी आदेश तक रहेगा। अध्यक्ष, सदस्यों और सचिव की सेवा शर्तें सरकार की ओर से अलग से निर्धारित की जाएंगी। आयोग के बजट और कार्यालय संबंधी व्यवस्था की जिम्मेदारी वित्त विभाग को सौंपी गई है।
सरकार को सिफारिशें सौंपेगा आयोग
राज्य कर्मचारी आयोग अपनी कार्यप्रणाली स्वयं तय कर सकेगा और जरूरत के अनुसार विभिन्न विभागों से जानकारी हासिल कर सकेगा। शासन भी आयोग को आवश्यक दस्तावेज और सहयोग उपलब्ध कराएगा। आयोग निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। आयोग के पुनर्गठन के बाद अब कर्मचारियों से जुड़े वेतनमान और सेवा संबंधी मुद्दों पर इसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, किसी भी वित्तीय लाभ पर अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों के बाद सरकार के स्तर पर ही होगा।
मध्य प्रदेश में राज्य कर्मचारी आयोग के पुनर्गठन से कर्मचारियों के वेतनमान और सेवा संबंधी मामलों के अध्ययन के लिए व्यवस्था फिर सक्रिय हुई है। मलय श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोग अब संबंधित मुद्दों पर अध्ययन कर सरकार को सिफारिशें देगा।
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