
दतिया/ संतोष चंसौलिया: नीमडांडा से किटाना को जोड़ने वाली 1.80 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण पूरा होने के महज पांच महीने बाद ही खराब होने लगी है। 98.87 लाख रुपये की लागत से बनी सड़क पर जगह-जगह गड्ढे और उखड़ी डामर की परत दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों ने इसके लिए लगातार गुजर रहे भारी और ओवरलोड वाहनों को बड़ी वजह बताया है। वहीं पीडब्ल्यूडी के एसडीओ ने भी सड़क पर हैवी लोड वाहनों की आवाजाही अधिक होने की बात कही है।
10 अप्रैल को पूरा हुआ था निर्माण, अब सड़क पर गड्ढे
नीमडांडा से किटाना को जोड़ने वाली करीब 1.80 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य 10 अप्रैल 2026 को पूरा हुआ था। करीब 98.87 लाख रुपये की लागत से तैयार हुई इस सड़क से आसपास के लोगों को बेहतर आवागमन की उम्मीद थी, लेकिन निर्माण के करीब पांच महीने बाद ही सड़क की स्थिति खराब नजर आने लगी है।
मौके की तस्वीरों में सड़क की सतह पर जगह-जगह गड्ढे दिखाई दे रहे हैं। कई हिस्सों में डामर की परत उखड़ गई है और नीचे की गिट्टी बाहर निकल आई है। सड़क के किनारे भी कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त नजर आ रहे हैं। नई सड़क के इतनी कम अवधि में खराब होने से इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नीमडांडा के पास रेत डंप, भारी वाहनों की आवाजाही
स्थानीय लोगों के अनुसार नीमडांडा के पास रेत का डंप लगा हुआ है। यहां से रेत लेकर भारी ट्रॉल, ट्रक और ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लगातार इस सड़क से गुजरती हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से सड़क पर दबाव बढ़ रहा है। इसी वजह से निर्माण के कुछ ही महीनों में सड़क की सतह टूटने लगी है। हालांकि सड़क के जल्द खराब होने में ओवरलोड वाहनों की भूमिका के साथ-साथ निर्माण गुणवत्ता की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है।
एसडीओ बोले- भोपाल स्तर तक कर चुका हूं शिकायत
सड़क की खराब स्थिति को लेकर पीडब्ल्यूडी के एसडीओ आरके मिश्रा से बात की गई। उन्होंने बताया कि सड़क पर हैवी लोड और ओवरलोड वाहनों की आवाजाही अधिक है। उनके अनुसार इस संबंध में उनके द्वारा भोपाल स्तर तक शिकायत भी की जा चुकी है, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
विभागीय अधिकारी द्वारा ओवरलोड वाहनों की आवाजाही की जानकारी होने और उच्च स्तर तक शिकायत किए जाने के बाद अब सवाल यह है कि इन वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी। यदि भारी वाहनों की आवाजाही लगातार जारी रहती है तो सड़क की मरम्मत के बाद भी उसके दोबारा क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी रहेगी।
पांच साल की परफॉर्मेंस गारंटी, पांच महीने में हालत खराब
सड़क से संबंधित जानकारी के अनुसार इसकी परफॉर्मेंस गारंटी अवधि पांच वर्ष है। ऐसे में निर्माण पूरा होने के करीब पांच महीने बाद ही सड़क पर गड्ढे और डामर की परत उखड़ने की स्थिति सामने आना गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण पर खर्च हुई करीब 98.87 लाख रुपये की राशि के बावजूद यदि सड़क कुछ ही महीनों में खराब होने लगेगी तो इसका सीधा असर सरकारी धन के उपयोग और आम लोगों की सुविधा पर पड़ेगा।
निर्माण गुणवत्ता की तकनीकी जांच की मांग
ग्रामीणों ने सड़क की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के जरिए यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि सड़क के जल्दी खराब होने के पीछे निर्माण गुणवत्ता की कमी है या फिर लगातार गुजर रहे भारी और ओवरलोड वाहनों का दबाव मुख्य कारण है।
इसके साथ ही लोगों ने सड़क की तत्काल मरम्मत कराने और रेत से भरे ओवरलोड वाहनों की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ सड़क की मरम्मत कर देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। यदि ओवरलोड वाहनों पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो मरम्मत के बाद सड़क फिर खराब हो सकती है।
अब सवाल यह है कि पांच साल की परफॉर्मेंस गारंटी वाली सड़क की पांच महीने में बिगड़ी स्थिति पर विभाग क्या कदम उठाता है और ओवरलोड वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए कब प्रभावी कार्रवाई की जाती है।
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