
टीकमगढ़/ दित्यपाल राजपूत: टीकमगढ़ में शासकीय विद्यालयों में लापरवाही और विभागीय दायित्वों का पालन नहीं करने पर कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने चार शिक्षकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की है। जिला शिक्षा अधिकारी की जांच रिपोर्ट और शिक्षकों के स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने के बाद सभी की दो वार्षिक वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोकने की शास्ति दी गई है।
जांच रिपोर्ट के आधार पर हुई कार्रवाई
टीकमगढ़ जिले में शासकीय स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था और शिक्षकों की कार्यप्रणाली में लापरवाही को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कराई गई जांच के बाद प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर चार शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई की गई।
जांच में संबंधित शिक्षकों के स्तर पर विद्यालय संचालन, नियमित उपस्थिति, शैक्षणिक कार्य और विभागीय निर्देशों के पालन में लापरवाही सामने आई। कार्रवाई से पहले सभी संबंधित शिक्षकों को अपना पक्ष रखने और स्पष्टीकरण देने का अवसर भी दिया गया था। हालांकि उनके जवाब समाधानकारक नहीं पाए गए।
इसके बाद मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत चारों शिक्षकों की दो वार्षिक वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोकने की शास्ति अधिरोपित की गई।
सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पर शिक्षक पर कार्रवाई
शासकीय प्राथमिक शाला हरकनपुरा, संकुल केंद्र स्यावनी में पदस्थ प्राथमिक शिक्षक जयशंकर गंगोलिया के खिलाफ सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत मिली थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कक्षा दूसरी के बच्चों की नियमित पढ़ाई नहीं कराई जा रही है। इसके अलावा विद्यालय में मोबाइल फोन का उपयोग करने, बच्चों के सामने धूम्रपान करने और विद्यालय में सोने जैसे आरोप भी लगाए गए थे।
जिला शिक्षा केंद्र टीकमगढ़ द्वारा शिकायत की जांच कराई गई। जांच में शिकायत से जुड़े बिंदु प्रमाणित पाए गए। शिक्षक को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।
जांच में पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर कलेक्टर ने उनकी दो वार्षिक वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोकने की कार्रवाई की।
बिना अनुमति अनुपस्थित रहने पर प्रभारी प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई
विकासखंड पलेरा की शासकीय प्राथमिक शाला दिनऊ के प्रभारी प्रधानाध्यापक रामसिया कौल के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। जांच में उनके बिना सूचना विद्यालय से अनुपस्थित रहने और विभागीय कार्यों में लापरवाही के तथ्य सामने आए।
जांच के अनुसार 30 सितंबर 2025 को वे बिना सूचना विद्यालय से अनुपस्थित थे। इससे पहले 26 और 27 सितंबर को भी उपस्थिति पंजी में आकस्मिक अवकाश दर्ज कर विद्यालय से अनुपस्थित पाए गए थे, जबकि उक्त अवकाश स्वीकृत नहीं था।
इसके अलावा सर्व शिक्षा अभियान से जुड़े यू-डाइस, एसएचव्हीआर और चाइल्ड ट्रैकर पोर्टल पर आवश्यक कार्य नहीं किया गया। जनशिक्षक द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब भी नहीं दिया गया।
विद्यालय संचालन से जुड़ी अनियमितताओं की खबरें समाचार पत्रों में प्रकाशित होने के बाद विभाग की छवि प्रभावित होने का मामला भी सामने आया। जिला शिक्षा केंद्र के कारण बताओ नोटिस के जवाब को असंतोषजनक पाए जाने के बाद उनकी दो वार्षिक वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोक दी गईं।
स्कूल बंद मिला, शिक्षक पर भी हुई कार्रवाई
शासकीय प्राथमिक शाला कोटराखेरा बूदौर, विकासखंड पलेरा के प्राथमिक शिक्षक अरविन्द कुमार चौरसिया के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। जांच में 24 जुलाई 2025 को विद्यालय बंद मिलने और शिक्षक के अनुपस्थित रहने की बात सामने आई।
जांच में यह भी पाया गया कि विद्यालय में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं किए जा रहे थे और शैक्षणिक कार्य में भी पर्याप्त रुचि नहीं ली जा रही थी। शिक्षक के नशे का सेवन कर विद्यालय आने की शिकायत भी जांच में सामने आई।
24 सितंबर 2025 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत पलेरा के निरीक्षण के दौरान विद्यालय में एक भी छात्र उपस्थित नहीं मिला था। इस मामले की खबर समाचार पत्र में भी प्रकाशित हुई थी।
इससे पहले 1 अक्टूबर 2024 को जिला परियोजना समन्वयक के निरीक्षण में भी अनियमितताएं मिली थीं। उस समय शिक्षक ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए भविष्य में सुधार का आश्वासन दिया था। बाद में दोबारा अनियमितताएं सामने आने और कारण बताओ नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उनकी दो वार्षिक वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोक दी गईं।
एक ही स्कूल के दूसरे शिक्षक पर भी कार्रवाई
इसी विद्यालय के प्राथमिक शिक्षक जगत कुमार अहिरवार के खिलाफ भी पदीय दायित्वों में लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की गई।
जांच में विद्यालय बंद कर अनुपस्थित रहने, छात्र संख्या बढ़ाने के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं करने और शैक्षणिक कार्य में पर्याप्त रुचि नहीं लेने के तथ्य सामने आए। उनके संबंध में भी नशे का सेवन कर विद्यालय आने की शिकायत जांच में सामने आई।
24 सितंबर 2025 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत पलेरा के निरीक्षण के दौरान विद्यालय में एक भी छात्र उपस्थित नहीं मिला था। इससे पहले 1 अक्टूबर 2024 को जिला शिक्षा केंद्र की टीम के निरीक्षण में भी अनियमितताएं मिली थीं।
उस समय शिक्षक ने अपनी गलती स्वीकार कर क्षमा मांगी थी और विद्यार्थियों की उपस्थिति तथा शैक्षणिक स्तर में सुधार का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद दोबारा लापरवाही पाए जाने और कारण बताओ नोटिस का जवाब समाधानकारक नहीं मिलने पर उनकी भी दो वार्षिक वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोकने की कार्रवाई की गई।
कलेक्टर ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने कहा कि शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना शिक्षकों का प्रमुख दायित्व है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालयों में अनुशासन, नियमित उपस्थिति, प्रभावी शिक्षण और विभागीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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