
आज हम आपके समक्ष मध्य प्रदेश के प्रशासनिक और स्वास्थ्य तंत्र से जुड़ा एक ऐसा सनसनीखेज और चौंकाने वाला पर्दाफ़ाश करने जा रहे हैं, जिसने सत्ता, नौकरशाही और कॉरपोरेट गठजोड़ के सभी मुखौटे उतार दिए हैं।
यह दास्तान उस दौर की है जब पूरा देश और मध्य प्रदेश कोरोना महामारी के भयावह दुष्चक्र से जूझ रहा था, आम जनता ऑक्सीजन, दवाओं और अस्पताल के बिस्तरों के लिए तड़प रही थी। उस अत्यंत पीड़ादायी और आपातकालीन समय में मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष नियंत्रक रहे तत्कालीन अपर मुख्य सचिव (एसीएस) के कार्यकाल में जिन रसूखदारों ने स्वास्थ्य सामग्री और सेवाओं की आपूर्ति के भारी-भरकम ठेके हासिल किए, आज वही लोग उस पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की निजी भूमि पर एक आलीशान फाइव-स्टार अस्पताल के साझीदार बन बैठे हैं!
जी हां, ब्रांडवाणी की विशेष पड़ताल में मध्य प्रदेश भू-अभिलेख के वे आधिकारिक दस्तावेज़ सामने आए हैं, जो स्पष्ट बयान करते हैं कि भोपाल के पॉश इलाके बावड़िया कलां में पूर्व एसीएस मोहम्मद सुलेमान और उनकी पत्नी सीमा सुलेमान के नाम दर्ज आवासीय भूमि पर किस तरह उन्हीं कोरोना सिंडिकेट के आपूर्तिकर्ताओं का आलीशान अस्पताल आकार ले रहा है।
देखिए हमारी यह विस्तृत खोजी रिपोर्ट और जानिए इस पूरे संदेहास्पद गठजोड़ की परत-दर-परत सच्चाई।”
1. दस्तावेज़ों का सबसे बड़ा सच: बावड़िया कलां की खसरा प्रविष्टियां
ब्रांडवाणी की इनवेस्टिगेटिव टीम ने मध्य प्रदेश भू-अभिलेख के राजस्व अभिलेखों की सूक्ष्मता से पड़ताल की। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, ज़िला भोपाल, तहसील कोलार के ग्राम बावड़िया कलां (पटवारी हल्का बावड़िया कलां) के वर्ष 2026-2027 के कंप्यूटरीकृत भू-अभिलेख के खसरा आंकड़ों में निम्नलिखित तथ्य दर्ज हैं:
· खसरा क्रमांक 9/2/8 (स):
इसका कुल क्षेत्रफल 0.1010 हेक्टेयर (लगभग 10,871 वर्ग फुट) है। इस भूखंड पर भू-स्वामी के रूप में श्री मोहम्मद सुलेमान, पिता श्री मोहम्मद अयूब एवं श्रीमती सीमा सुलेमान, पति श्री मोहम्मद सुलेमान का नाम दर्ज है। अभिलेख के अनुसार इस भूमि का निर्धारित उपयोग ‘आवासीय‘ है तथा भू-राजस्व 2020.00 रुपये निर्धारित है। न्यायालय तहसीलदार के प्रकरण क्रमांक 1013/अ-6/2023-24, आदेश दिनांक 28/07/2023 के तहत भू-अभिलेख अद्यतन किया गया। इसके बाद व्यपवर्तन (डायवर्सन) सूचना क्रमांक 22141621375, चालान क्रमांक 051/9999999/0029/03/25/046193 के माध्यम से 22,220 रुपये की राशि दिनांक 06/03/2025 को जमा की गई, जिसकी पुष्टि उपखंड अधिकारी (एसडीओ) द्वारा 08/03/2025 को की गई।
· संलग्न खसरा क्रमांक 9/2/9 (स):
ठीक इसके साथ लगा हुआ दूसरा भूखंड खसरा क्रमांक 9/2/9 (स) है, जिसका क्षेत्रफल भी ठीक 0.1010 हेक्टेयर है। इस भूमि पर भू-स्वामी के रूप में श्री ज्ञानेन्द्र सिंह, पिता श्री शिवप्रसाद सिंह एवं श्रीमती लक्ष्मी सिंह दर्ज हैं। न्यायालय तहसीलदार के प्रकरण क्रमांक 3447/अ-6/2023-24, आदेश दिनांक 29/01/2024 के तहत रिकॉर्ड अद्यतन हुआ। इस भूखंड का भी डायवर्सन चालान दिनांक 06/03/2025 को 22,220 रुपये जमा कर उपखंड अधिकारी द्वारा 08/03/2025 को ही पुष्ट किया गया।
दोनों भूखंडों का समान क्षेत्रफल और डायवर्सन की प्रक्रिया एक ही तारीख और समयावधि में पूरा होना यह साबित करता है कि एक सोची-समझी योजना के तहत इस संयुक्त भूखंड को अस्पताल निर्माण के उद्देश्य से तैयार किया गया।
2. कोरोना महामारी का कारोबार और अफ़सरशाही का संरक्षण
वर्ष 2020 और 2021 का वह भयावह दौर कोई नहीं भूल सकता, जब संपूर्ण प्रदेश वैश्विक महामारी के प्रकोप में था। उस संकटकाल में स्वास्थ्य विभाग की बागडोर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मोहम्मद सुलेमान के हाथों में थी। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान आपातकालीन खरीद के नाम पर करोड़ों रुपये के अनुबंध जारी किए गए:
1. सीटी स्कैन मशीन आपूर्तिकर्ता: महामारी के दौरान ज़िला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में सीटी स्कैन की अनिवार्यता दर्शाते हुए निजी वेंडर को बड़ा ठेका आवंटित किया गया।
2. लैब टेस्टिंग सिंडिकेट: निजी पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक लैब्स को मनमाने दामों और शर्तों पर आरटी-पीसीआर एवं रक्त परीक्षण के बड़े अनुबंध सौंपे गए।
3. विवादित फ़ार्मा एवं मेडिकल लॉजिस्टिक्स कंपनी: तीसरा साझीदार वह समूह रहा, जिसका आपातकालीन दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति में अत्यधिक संदेहास्पद और विवादित रिकॉर्ड सामने आया था।
जनता के टैक्स के पैसों और आपदा राहत कोष से की गई इन खरीदों में इन तीनों व्यवसायियों ने अप्रत्याशित मुनाफा कमाया। परंतु सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आपदा काल में लाभ कमाने वाले वही तीनों आपूर्तिकर्ता आगे चलकर उसी पूर्व एसीएस के साथ व्यावसायिक रिश्ते में आ गए।
3. ‘फाइव-स्टार अस्पताल‘ का गठजोड़, क्या यह सीधे तौर पर लाभ के बदले लाभ का मामला है?
जहां आम नागरिक और छोटे व्यापारियों को ज़मीन की रजिस्ट्री और नामांतरण-डायवर्सन कराने में महीनों दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, वहीं राजधानी भोपाल के कोलार क्षेत्र स्थित बावड़िया कलां जैसे मुख्य और मूल्यवान स्थान पर लगभग आधी एकड़ से अधिक आवासीय भूमि पर एक भव्य, आधुनिक फाइव-स्टार अस्पताल की नींव रख दी गई।
यहां गंभीर सवाल खड़े होते हैं:
· क्या यह केवल एक संयोग है कि जिन वेंडरों को कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग से बड़े पैमाने पर काम मिला, वही वेंडर बाद में पूर्व एसीएस की निजी संपत्ति पर बनने वाले अस्पताल के साझेदार बन गए?
· क्या उच्च प्रशासनिक पद पर रहते हुए दिए गए अनुबंधों का परोक्ष प्रतिफल इस प्रकार निजी निवेश और आलीशान अस्पताल की साझेदारी के रूप में सामने आ रहा है?
· आवासीय उपयोग के लिए दर्ज ज़मीन पर व्यावसायिक स्तर के चिकित्सा संस्थान की स्थापना की प्रशासनिक अनुमतियां किस प्रक्रिया के तहत दी गईं?
“भोपाल की कोलार तहसील के ग्राम बावड़िया कलां में राजस्व के सरकारी दस्तावेज़ चीख-चीख कर एक ऐसी कहानी बयां कर रहे हैं, जिसे प्रशासनिक फाइलों के भीतर दबाने की पुरजोर कोशिश की गई। दस्तावेज़ नंबर एक — खसरा क्रमांक 9/2/8 (स)! मालिक का नाम — पूर्व एसीएस मोहम्मद सुलेमान और सीमा सुलेमान! दस्तावेज़ नंबर दो — खसरा क्रमांक 9/2/9 (स)! मालिक का नाम — ज्ञानेन्द्र सिंह और लक्ष्मी सिंह!”
भोपाल की कोलार तहसील के राजस्व क्षेत्र के निकट, जहां वर्ष 2023 से 2025 के बीच राजस्व अभिलेखों में अत्यधिक तीव्र गति से बदलाव किए गए। 28 जुलाई 2023 को तहसीलदार न्यायालय से आदेश जारी होता है और मार्च 2025 में आवासीय व्यपवर्तन पर अंतिम मुहर लग जाती है। लेकिन असली हकीकत तब उजागर होती है, जब इस भूमि पर किसी सामान्य आवास का नहीं, बल्कि कोरोना काल के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिलकर एक कॉरपोरेट फाइव-स्टार अस्पताल का ढांचा तैयार किया जाने लगता है!”
· “स्वास्थ्य विभाग के पूर्व एसीएस की ज़मीन पर कोरोना काल के सप्लायरों का फाइव-स्टार अस्पताल”
· “एसीएस के कार्यकाल में ही तीनों आपूर्तिकर्ताओं को मिले थे महत्वपूर्ण सप्लाई ठेके”
· “एक ने दी सीटी स्कैन मशीन, दूसरे ने संभाली लैब टेस्टिंग और तीसरा विवादित कंपनी का साझीदार!”
“आखिर कौन हैं ये तीन आपूर्तिकर्ता? ये वही चेहरे हैं जिन्होंने मध्य प्रदेश में कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान सरकारी बजट से भारी-भरकम अनुबंध हासिल किए। उस समय स्वास्थ्य विभाग के नीतिगत निर्णय और अनुमोदन सीधे तौर पर एसीएस मोहम्मद सुलेमान के अधीन थे। सीटी स्कैन के नाम पर बड़े भुगतान हुए, डायग्नोस्टिक टेस्टिंग के ठेके चुनिंदा फर्मों को दिए गए, और अब वही कारोबारी पूर्व स्वास्थ्य एसीएस के परिवार की भूमि पर उनके व्यावसायिक साझीदार के रूप में सामने आ रहे हैं।”
ब्रांडवाणी के तीखे सवाल (शासन एवं जांच एजेंसियों से):
1. हितों के टकराव (कन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) का उल्लंघन:
क्या सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी द्वारा अपने पूर्व विभागीय ठेकेदारों और वेंडरों के साथ निजी संपत्ति पर व्यावसायिक गठबंधन बनाना अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के दायरे में नहीं आता?
2. डायवर्सन और भूमि का स्वरूप:
राजस्व खसरा खतौनी में भूमि का निर्धारित उपयोग स्पष्ट रूप से ‘आवासीय‘ दर्ज है। ऐसे में वहां पूर्णतः व्यावसायिक स्तर का मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल किस नियमावली के अंतर्गत प्रस्तावित किया गया?
3. पूंजी का स्रोत और निवेश की पड़ताल:
इस वृहद अस्पताल निर्माण में लगने वाली भारी पूंजी का वास्तविक स्रोत क्या है? क्या जांच एजेंसियां यह पड़ताल करेंगी कि कहीं इसमें वही संसाधन तो नहीं खपाए जा रहे जो आपदा के दौर में जुटाए गए थे?
4. जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली:
जहां छोटे कर्मचारियों और मामलों में तुरंत सतर्कता एजेंसियां सक्रिय हो जाती हैं, वहीं पूर्व एसीएस और प्रभावशाली मेडिकल सिंडिकेट के इस गठजोड़ पर लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू (EOW) और अन्य सक्षम जांच एजेंसियों द्वारा अब तक संज्ञान क्यों नहीं लिया गया?
“महामारी की विभीषिका के घाव भले ही समय के साथ भर रहे हों, परंतु उस आपदा के बीच स्थापित किए गए कथित व्यावसायिक साम्राज्यों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है। ब्रांडवाणी समाचार शासन और प्रशासन के शीर्ष पदों पर बैठे जिम्मेदारों को यह स्पष्ट करना चाहता है कि सरकारी रिकॉर्ड और खसरा प्रविष्टियां किसी के दबाव में नहीं बदलतीं। हम इस पूरे मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन, कंपनी पंजीकरण और निर्माण अनुमतियों की एक-एक कड़ी की पड़ताल लगातार जारी रखेंगे। हमारा उद्देश्य स्पष्ट है — बिना किसी भय के, बिना किसी दबाव के, सिर्फ और सिर्फ जनता के सामने सच लाना।
देखते रहिए ब्रांडवाणी समाचार — ना डर, ना दबाव, सिर्फ सच।”
- pandemic-profit-five-star-hospital-mohammad-suleman-corona-suppliers








