
संसद के आगामी सत्र में बजट और एपस्टीन से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक तापमान बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस की संभावना को देखते हुए चर्चा के लिए करीब 18 घंटे का समय तय किया गया है, जो इस मुद्दे की गंभीरता और राजनीतिक महत्व को दर्शाता है।
सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस बहस में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। माना जा रहा है कि वे बजट की प्राथमिकताओं और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने के साथ-साथ एपस्टीन मामले से जुड़े अंतरराष्ट्रीय खुलासों को भी चर्चा के केंद्र में रखेंगे।
वहीं, सत्तापक्ष की रणनीति बजट को विकास और आर्थिक स्थिरता के रूप में प्रस्तुत करने की होगी। सरकार यह दिखाने की कोशिश करेगी कि बजट में गरीब, मध्यम वर्ग और बुनियादी ढांचे के लिए किए गए प्रावधान देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाले हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बहस सिर्फ बजट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सरकार और विपक्ष के बीच वैचारिक संघर्ष का मंच बन सकती है। अगर दोनों पक्षों के बीच टकराव बढ़ता है, तो संसद में कार्यवाही बाधित होने और राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की भी संभावना है।









