
शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म की प्रमुख पूर्णिमाओं में से एक मानी जाती है। इसे कोजागरी पूर्णिमा, रास पूर्णिमा और कौमुदी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा करने की परंपरा है। इस साल शरद पूर्णिमा की तारीख को लेकर लोगों में असमंजस है कि पर्व 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा या 26 अक्टूबर को। पंचांग के अनुसार मुख्य पर्व 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
25 अक्टूबर को मनाई जाएगी शरद पूर्णिमा
पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब 11:55 बजे शुरू होगी और 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे समाप्त होगी। चूंकि पूर्णिमा की रात 25 अक्टूबर को पड़ रही है, इसलिए इसी दिन शरद पूर्णिमा का मुख्य पर्व मनाया जाएगा। वहीं 26 अक्टूबर की सुबह पूर्णिमा तिथि के दौरान स्नान और दान किया जा सकता है।
चंद्रमा की पूजा और लक्ष्मी पूजन का समय
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। दिल्ली में 25 अक्टूबर को चंद्रोदय शाम करीब 5 बजे बताया गया है। हालांकि, अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय का समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। वहीं निशीथ काल रात करीब 11:39 बजे से 12:31 बजे तक रहेगा। इसी अवधि में मां लक्ष्मी की पूजा और मंत्र जाप करने की परंपरा है।
चांदनी में कब रखें खीर?
शरद पूर्णिमा की सबसे प्रमुख परंपराओं में से एक रात में खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखना है। इस साल 25 अक्टूबर की रात खीर रखने की परंपरा निभाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, भद्रा रहित समय में रात 10:32 बजे से 12:22 बजे तक खीर रखना शुभ माना गया है। लक्ष्मी पूजा के लिए रात 11:32 बजे से 12:28 बजे तक का समय बताया गया है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणों में अमृत जैसा प्रभाव माना जाता है। इसी विश्वास के चलते खीर को चांदनी में रखा जाता है और अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। हालांकि, इससे जुड़े स्वास्थ्य लाभों के दावों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
ऐसे करें शरद पूर्णिमा की पूजा
सुबह स्नान के बाद घर के पूजा स्थल की सफाई करें। मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद जल से अर्घ्य दें। इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा कर खीर का भोग लगाया जा सकता है। कई परिवारों में इस रात जागरण, भजन और मंत्र जाप करने की परंपरा भी है।
खीर को चांदनी में रखते समय साफ बर्तन का इस्तेमाल करें और उसे जाली या ढक्कन से ढककर रखें, ताकि धूल और कीड़े उसमें न गिरें।
शरद पूर्णिमा 2026 का मुख्य पर्व 25 अक्टूबर की रात मनाया जाएगा। इस दिन चंद्र पूजा, लक्ष्मी पूजन और चांदनी में खीर रखने की परंपरा निभाई जाएगी। 26 अक्टूबर की सुबह पूर्णिमा तिथि समाप्त होने से पहले स्नान और दान किया जा सकता है।
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