
टीकमगढ़/ दित्यपाल राजपूत: टीकमगढ़ के बम्होरी बराना स्थित शासकीय कन्या माध्यमिक शाला और शासकीय बालक माध्यमिक शाला में शिक्षण व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों ने कुछ शिक्षकों पर नियमित रूप से विद्यालय में उपलब्ध नहीं रहने और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने कलेक्टर से दोनों विद्यालयों की निष्पक्ष जांच कराने और अनियमितता मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
उपस्थिति के बाद निजी कार्यों में व्यस्त रहने का आरोप
बम्होरी बराना के दोनों शासकीय माध्यमिक विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ शिक्षक विद्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने के बाद निजी कार्यों में व्यस्त रहते हैं। इसके चलते वे विद्यार्थियों को नियमित रूप से पढ़ाने के लिए उपलब्ध नहीं रहते।
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षकों की कथित अनियमित उपस्थिति का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। उनका आरोप है कि विद्यालयों में विद्यार्थियों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है, जिससे बच्चों के भविष्य को लेकर अभिभावकों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ रही है।
कई बार शिकायत के बाद भी समाधान नहीं होने का दावा
ग्रामीणों के अनुसार शिक्षकों की कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन समस्या का अपेक्षित समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विद्यालय में शिक्षक नियमित रूप से उपस्थित रहें और अपने शैक्षणिक दायित्वों का पालन करें तो गांव के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सकती है।
ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए दोनों विद्यालयों में नियमित निरीक्षण की आवश्यकता बताई है।
स्थानीय शिक्षकों की पदस्थापना पर भी उठाए सवाल
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि दोनों विद्यालयों में पदस्थ ज्यादातर शिक्षक स्थानीय गांव के ही हैं और कई वर्षों से वहीं पदस्थ हैं। ग्रामीणों का दावा है कि शिकायत करने वाले लोगों पर कथित रूप से दबाव बनाया जाता है या शिकायत वापस लेने के लिए धमकाया जाता है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में ग्रामीणों द्वारा लगाए गए इन आरोपों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि शासकीय कन्या माध्यमिक शाला और शासकीय बालक माध्यमिक शाला की विस्तृत जांच कराई जाए। उन्होंने शिक्षकों की उपस्थिति, कक्षा संचालन, विद्यार्थियों की पढ़ाई और पिछले वर्षों की कार्यप्रणाली की भी जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि जांच के दौरान यदि किसी शिक्षक या कर्मचारी की लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब ग्रामीणों की शिकायत के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग दोनों विद्यालयों की जांच कराते हैं या नहीं और जांच में क्या स्थिति सामने आती है, इस पर ग्रामीणों और अभिभावकों की नजर बनी हुई है।
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