
सार
धर्मेंद्र सिंह लोधी | मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले को ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रे वॉटर प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। आईएससी-फिक्की सैनिटेशन अवार्ड-2026 में जिले को ग्रे वॉटर प्रबंधन श्रेणी में विजेता घोषित किया गया। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने टीम के साथ पुरस्कार ग्रहण किया। चंद्रपुरा गांव से शुरू हुई भूमिगत जल निकासी की पहल अब जिले की 225 ग्राम पंचायतों तक पहुंच चुकी है।
विस्तार
टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायतों द्वारा गांवों में गंदे पानी, कीचड़ और जलभराव की समस्या से निपटने के लिए किए गए प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान मिली है। 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया सैनिटेशन कॉन्क्लेव में टीकमगढ़ को आईएससी-फिक्की सैनिटेशन अवार्ड-2026 में ग्रे वॉटर प्रबंधन श्रेणी में राष्ट्रीय विजेता का सम्मान दिया गया। कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने जिला प्रशासन की टीम के साथ पुरस्कार ग्रहण किया।
टीकमगढ़ में ग्रे वॉटर प्रबंधन की पहल चंद्रपुरा गांव से शुरू हुई थी। यहां घरों से निकलने वाले स्नान, कपड़े धोने और रसोई के पानी को खुले में बहने से रोकने के लिए घरों के बाहर सिल्ट चैंबर बनाए गए। इन चैंबरों को भूमिगत पाइपलाइन से जोड़ा गया और पानी को गांव के अंतिम बिंदु तक पहुंचाकर सोख्ता गड्ढे यानी लीच पिट के माध्यम से निस्तारित करने की व्यवस्था की गई।
इस व्यवस्था में चैंबर के स्तर पर गाद और ठोस पदार्थों को रोकने की व्यवस्था की जाती है, जिससे भूमिगत पाइपलाइन में रुकावट की संभावना कम होती है। कुछ स्थानों पर ग्रे वॉटर के उपचार और पुन: उपयोग के लिए थ्री-स्टेज फिल्टर की व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है। इससे खुले में गंदा पानी बहने, कीचड़ और जलभराव की समस्या को कम करने में मदद मिली है।
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चंद्रपुरा में मिले सकारात्मक परिणामों के बाद जिला प्रशासन ने इस मॉडल को अन्य ग्राम पंचायतों तक पहुंचाने की योजना बनाई। तकनीकी मार्गदर्शन, चरणबद्ध कार्ययोजना और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के उपयोग से पिछले दो वर्षों में यह व्यवस्था 225 गांवों तक पहुंचने की जानकारी दी गई है। कुछ रिपोर्टों में इसे जिले की करीब 70 प्रतिशत पंचायतों तक लागू बताया गया है, जबकि इंडिया सैनिटेशन कोएलिशन की पोस्ट में 165 ग्राम पंचायतों तक विस्तार का उल्लेख है। इसलिए अलग-अलग रिपोर्टों में कवरेज का आंकड़ा अलग है।
भूमिगत जल निकासी व्यवस्था का असर गांवों की गलियों में भी दिखाई देने का दावा किया गया है। खुले में गंदा पानी कम बहने से कीचड़ और जलभराव में कमी आई है और ग्रामीणों के आवागमन में सुविधा हुई है। जिला प्रशासन के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य केवल ड्रेनेज व्यवस्था तैयार करना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवेश और जीवन गुणवत्ता में सुधार लाना भी है।
कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने इस सम्मान को ग्राम पंचायतों के संकल्प, विश्वास और प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि चंद्रपुरा से शुरू हुई पहल का विस्तार अब बड़ी संख्या में गांवों तक हुआ है और स्थानीय स्तर पर विकसित इस मॉडल को आगे भी प्रभावी बनाने तथा उसके संचालन और रखरखाव पर ध्यान दिया जाएगा।
इस नवाचार को आईएससी की राष्ट्रीय पत्रिका में केस स्टडी के रूप में प्रकाशित किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। टीकमगढ़ की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू अपशिष्ट जल के प्रबंधन के लिए स्थानीय संसाधनों और तकनीकी सहयोग के इस्तेमाल का उदाहरण बनकर सामने आई है।
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