
उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर और महाकाल महालोक की सुरक्षा को लेकर गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात बड़ी मॉक ड्रिल आयोजित की गई। राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के 100 से अधिक कमांडो ने करीब तीन घंटे तक चले इस अभ्यास में हिस्सा लिया। अभ्यास का उद्देश्य संभावित आतंकी हमले या किसी गंभीर आपात स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों और आपसी समन्वय को परखना था।
रात 11 बजे से तड़के 2 बजे तक चला सुरक्षा अभ्यास
मॉक ड्रिल रात करीब 11 बजे शुरू हुई और तड़के 2 बजे तक चली। अभ्यास का क्षेत्र महाकाल महालोक के मानसरोवर क्षेत्र से लेकर त्रिनेत्र कंट्रोल रूम के बीच रखा गया। इस दौरान सुरक्षा बलों ने आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई करने का अभ्यास किया।
ड्रिल में संभावित घुसपैठ की स्थिति, संदिग्धों की तलाश और डमी बंधकों को सुरक्षित बाहर निकालने जैसी परिस्थितियों का अभ्यास किया गया। स्थानीय पुलिस, प्रशासन और मंदिर प्रबंधन के साथ एनएसजी के समन्वय को भी परखा गया।
अंधेरा होते ही सक्रिय हुए NSG कमांडो
अभ्यास के दौरान मंदिर परिसर में अचानक अंधेरा किया गया। इसके बाद एनएसजी कमांडो ने संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए तलाशी अभियान शुरू किया। बाहर से देखने वाले लोगों के लिए यह दृश्य अचानक और चौंकाने वाला था, लेकिन यह पूरी तरह नियोजित सुरक्षा अभ्यास था।
इस तरह की ड्रिल का उद्देश्य केवल कमांडो की कार्रवाई देखना नहीं, बल्कि यह जांचना भी होता है कि वास्तविक संकट के समय अलग-अलग एजेंसियां कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से एक-दूसरे के साथ काम कर सकती हैं।
सिंहस्थ 2028 से पहले सुरक्षा पर विशेष फोकस
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियां भी तेजी से चल रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस पहले से ही विशेष योजना पर काम कर रही है। इसमें भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, ड्रोन निगरानी, सीसीटीवी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।
सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों पर मजबूत किया जा रहा है। पहले से तैयार सुरक्षा योजना में हजारों प्रशिक्षित जवानों और स्वयंसेवकों की तैनाती की भी योजना है।
महाकाल मंदिर की सुरक्षा क्यों है अहम
महाकालेश्वर मंदिर में पूरे साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। विशेष पर्व और धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियां महत्वपूर्ण हो जाती हैं।
सिंहस्थ 2028 से पहले इस तरह के अभ्यासों के जरिए संभावित कमजोरियों की पहचान करने और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी सिंहस्थ से जुड़े कार्यों को तय समयसीमा में पूरा करने और यातायात, पार्किंग तथा श्रद्धालुओं की आवाजाही की बेहतर योजना बनाने के निर्देश दिए हैं।
महाकाल मंदिर में हुई एनएसजी की मेगा मॉक ड्रिल ने यह साफ किया कि सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन की सुरक्षा तैयारियों पर खास जोर दिया जा रहा है। हालांकि यह अभ्यास था, लेकिन इसके जरिए वास्तविक आपात स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया क्षमता और आपसी तालमेल को परखा गया।
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