
UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने विदेशी दबाव के आरोपों को खारिज किया है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि UPI से जुड़े फैसले भारत सरकार अपने स्तर पर लेती है। नए नियमों के तहत 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा, जबकि आम ग्राहकों के लिए UPI से पैसे भेजना अब भी मुफ्त रहेगा।
विदेशी दबाव के आरोपों पर सरकार की सफाई
UPI पर नए शुल्क ढांचे को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के बीच वित्त मंत्रालय ने बुधवार को साफ किया कि यह फैसला किसी विदेशी दबाव में नहीं लिया गया है। मंत्रालय के मुताबिक भारत की डिजिटल पेमेंट नीति देश की जरूरतों और डिजिटल पेमेंट सिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता को ध्यान में रखकर तय की जाती है।
विपक्ष की ओर से आरोप लगाया गया था कि UPI पर MDR लागू करने का फैसला विदेशी हितों और अमेरिकी कार्ड कंपनियों के दबाव से जुड़ा है। सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि UPI को लेकर लिए जा रहे फैसलों का आधार भारत का अपना डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम है।
15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR ढांचा
नए नियमों के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है। हालांकि सभी UPI भुगतान इस दायरे में नहीं आएंगे। छोटे और कुछ विशेष श्रेणी के कारोबारियों को राहत दी गई है।
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले मर्चेंट से भुगतान प्रक्रिया में शामिल संस्थानों द्वारा लिया जाता है। यह सीधे ग्राहक से वसूला जाने वाला UPI ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं है।
आम लोगों के लिए UPI रहेगा मुफ्त
सरकार ने सबसे अहम बात यह स्पष्ट की है कि व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। यानी किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को UPI के जरिए पैसे भेजने पर ग्राहक से चार्ज नहीं लिया जाएगा।
मर्चेंट को किए जाने वाले छोटे भुगतान पर भी व्यापक स्तर पर शुल्क नहीं लगेगा। नए ढांचे का उद्देश्य चुनिंदा बड़े मर्चेंट लेनदेन पर शुल्क व्यवस्था बनाना है, न कि हर UPI भुगतान को चार्जेबल बनाना।
सरकार ने क्यों बदला शुल्क ढांचा?
सरकार और भुगतान क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय तक जीरो-MDR व्यवस्था रहने के कारण UPI इकोसिस्टम की लागत का बड़ा हिस्सा बैंकों और अन्य भुगतान संस्थानों को उठाना पड़ता रहा। नए MDR ढांचे को UPI के वित्तीय रूप से टिकाऊ विकास और इसके विस्तार के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मॉडल के तौर पर पेश किया गया है।
UPI का इस्तेमाल लगातार बड़े स्तर पर हो रहा है। अगस्त 2026 में UPI के जरिए 24.5 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि करीब 29.82 लाख करोड़ रुपये रही। ऐसे में सिस्टम की लागत और उसके लंबे समय तक संचालन को लेकर शुल्क मॉडल पर बहस बढ़ी है।
क्या ग्राहक से भी वसूला जा सकता है पैसा?
सरकार का कहना है कि MDR मर्चेंट पर लागू होगा और ग्राहक से सीधे यह शुल्क नहीं लिया जाएगा। सरकार ने बैंकों को भी निर्देश दिया है कि अतिरिक्त MDR लागत को ग्राहकों पर न डाला जाए। हालांकि कुछ विश्लेषणों में यह चिंता जताई गई है कि भविष्य में कुछ कारोबारी अपनी लागत को किसी अन्य तरीके से ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं।
इसलिए नए नियम लागू होने के बाद दुकानदारों और ग्राहकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शुल्क व्यवहार में किस तरह लागू होता है।
UPI पर पूरी तरह खत्म नहीं हो रही मुफ्त सुविधा
नए नियमों को लेकर सोशल मीडिया पर यह धारणा भी बनी कि अब UPI इस्तेमाल करने पर हर भुगतान पर चार्ज लगेगा। सरकार ने इसे स्पष्ट रूप से गलत बताया है। व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान मुफ्त रहेगा और 2,000 रुपये तक के सामान्य मर्चेंट भुगतान भी MDR के दायरे से बाहर रखे गए हैं।
इस तरह नए नियम का असर मुख्य रूप से तय सीमा से ऊपर के पात्र मर्चेंट लेनदेन पर पड़ेगा, जबकि रोजमर्रा के छोटे UPI भुगतानों का बड़ा हिस्सा पहले की तरह बिना सीधे शुल्क के जारी रहेगा।
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