
आंकड़ों की बाजीगरी और जमीनी हकीकत
नमस्कार, आप देख रहे हैं ‘ब्रांडवाणी समाचार’ और मैं हूँ आपके साथ ‘कलम की धार’ कार्यक्रम में। आज हम बात करेंगे उस सच की, जिसे चमकदार आंकड़ों, होर्डिंग्स और बड़े-बड़े दावों के पीछे छिपाने की कोशिश की जा रही है। देश में लगातार 7.8% की जीडीपी ग्रोथ का डंका पीटा जा रहा है। टीवी चैनलों से लेकर अखबारों के पन्नों तक, हर जगह यह बताया जा रहा है कि देश विश्वगुरु बनने की राह पर तेजी से दौड़ रहा है। लेकिन क्या सच में ऐसा है? क्या यह 7.8% का विकास आम आदमी की थाली, उसके घर और उसकी जेब तक पहुँच रहा है? या फिर यह एक सत्ता को बनाए रखने के लिए जनता के साथ खेला जा रहा एक बहुत बड़ा और क्रूर खेल है? आज ‘कलम की धार’ से इन्हीं सवालों की चीर-फाड़ करेंगे।
जाति–धर्म का भ्रम और राजनेताओं–अधिकारियों का साम्राज्य
आज देश की जनता को एक सोची-समझी रणनीति के तहत जाति, धर्म और तमाम भ्रामक मुद्दों में उलझा कर रखा गया है। जब जनता मंदिर-मस्जिद, अगड़े-पिछड़े और हिंदू-मुस्लिम की बहसों में अपना खून जला रही होती है, तब पर्दे के पीछे एक अलग ही खेल चल रहा होता है। यह खेल है सत्ता और संपत्ति पर एकाधिकार का।
देश के हर राज्य में आज यह कड़वी सच्चाई देखी जा सकती है कि कैसे चंद नेता और सत्ता के शीर्ष पर बैठे रसूखदार अधिकारी अपनी तिजोरियां भर रहे हैं। जो लोग पावर में बैठे हैं, वे एक के बाद एक 1000-1000 एकड़ की जमीनें खरीद रहे हैं, उनके आलीशान महल खड़े हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, आप अपने दिल पर हाथ रखकर सोचिए— क्या आज के इस दौर में एक आम आदमी, एक मध्यमवर्गीय नौकरीपेशा या एक छोटे व्यापारी के लिए अपने जीवनकाल में एक छोटा सा प्लॉट या एक घर खरीदना भी संभव रह गया है? आपके मन से स्वतः ही जवाब आएगा— ‘नहीं, यह अब संभव नहीं है।’ आम आदमी जीवन भर ईएमआई के बोझ तले दबता जा रहा है, जबकि राजनेताओं और कुछ अधिकारी की संपत्ति हर चुनाव में दोगुनी-तिगुनी रफ्तार से बढ़ रही है।
मुफ्त की रेवड़ियां और 80 करोड़ गरीबों का सच
अगर सच में देश की विकास दर 7.8% है और अर्थव्यवस्था कुलांचे भर रही है, तो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार को देश के 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन क्यों बांटना पड़ रहा है? यह एक सीधा और तार्किक सवाल है। एक तरफ आप कहते हैं कि देश अमीर हो रहा है, और दूसरी तरफ आप मान रहे हैं कि देश की आधी से ज्यादा आबादी अपना पेट पालने में भी असमर्थ है।
यह कोई जनकल्याण नहीं, बल्कि चुनाव जीतने और भ्रष्टाचार की जड़ों को गहरा करने का एक सुनियोजित मॉडल है। चुनाव आते ही ये भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) लाडली बहना तो युवाओं के लिए कोई मुफ्त योजना लाकर ‘फ्री’ (मुफ्त) की कोई नई योजना निकाल देती हैं, ताकि किसी और राजनीतिक विकल्प के लिए कोई जगह ही न बचे। आज राजनीति से सहानुभूति और सेवाभाव पूरी तरह खत्म हो चुका है। अब सिर्फ पैसे, मुफ्त के लालच और बड़े-बड़े पोस्टर-बैनरों से जनता की भावनाएं और उनके वोट खरीदे जा रहे हैं।
मध्य प्रदेश में ‘लाड़ली बहना‘ योजना, मदद या मजबूरी का मजाक?
आइए, इसका एक जीता-जागता उदाहरण मध्य प्रदेश से लेते हैं। प्रदेश में लाखों महिलाओं को ‘लाड़ली बहना’ योजना के नाम पर हर महीने 1500 रुपये दिए जा रहे हैं। क्या आपने कभी गहराई से सोचा है कि आज की इस कमरतोड़ महंगाई में 1500 रुपये की क्या बिसात है? क्या इन 1500 रुपयों से एक महीने के घर का राशन आ सकता है? क्या इन रुपयों से महिलाएं अपने सपनों का घर बना सकती हैं या घूमने के लिए कोई कार खरीद सकती हैं? जवाब फिर वही आएगा— नहीं। लेकिन उनके हालात से खेल कर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अपने वोट साध रही है
यह सिर्फ एक राजनीतिक झुनझुना है, जो महिलाओं को थमा दिया गया है ताकि उनका वोट सुनिश्चित किया जा सके। इसी तरह, उन युवाओं की बात करें जो डिग्रियां लेकर दर-दर भटक रहे हैं। जो युवा कुछ नहीं कर पा रहे, उन्हें रोजगार या सशक्तिकरण देने के बजाय चंद रुपये उनके हाथ में थमा कर उनकी बेरोजगारी का जो क्रूर मजाक उड़ाया जा रहा है, क्या ये नेता और ये अधिकारी अपने बच्चों के साथ ऐसा करते हैं, कभी आपने सोचा है? वह चिंताजनक है। विकास का मतलब लोगों को आत्मनिर्भर बनाना होता है, न कि उन्हें सरकारी खैरात का मोहताज बनाकर उनका स्वाभिमान कुचल देना।
अर्थव्यवस्था के खतरे, शेयर बाजार, सोना–चांदी और आने वाला संकट
अब बात करते हैं उस आर्थिक बुलबुले की जो कभी भी फूट सकता है। सरकार के 7.8% ग्रोथ के दावों के बीच शेयर बाजार हिचकोले क्यों खा रहा है? बाजार में निवेशकों का पैसा क्यों डूब रहा है? आर्थिक विश्लेषकों और बाजार की नब्ज समझने वालों की मानें तो अगले 2 से 3 महीनों में हालात और भी बुरे होने वाले हैं। सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं, बल्कि सोना-चांदी जो आज आसमान छू रहे हैं, वो भी औंधे मुंह नीचे गिर सकते हैं।
आज जो लोग यह सोचकर सोना-चांदी खरीद कर बैठे हैं कि यह सबसे सुरक्षित निवेश है, आने वाले समय में उन्हें भारी बर्बादी का सामना करना पड़ सकता है। यह सब उस अस्थिर अर्थव्यवस्था का परिणाम है जिसे मजबूत दिखाने के लिए सिर्फ प्रचार तंत्र का सहारा लिया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत खोखली हो चुकी है।
प्रचार तंत्र की सीमा और 2029 का भविष्य
इतिहास गवाह है कि कोई भी झूठ या छलावा हमेशा के लिए नहीं टिक सकता। एक ऐसा समय जरूर आएगा जब यह विशालकाय ‘प्रचार तंत्र’ असफल हो जाएगा। जैसे ही जनता का मोहभंग होगा और वर्तमान नेतृत्व (नरेंद्र मोदी) का चेहरा राजनीतिक रूप से कमजोर पड़ने लगेगा, सत्ता की भूख इस कदर हावी रहेगी कि रातों-रात भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की पीआर मशीनरी एक नया चेहरा लाकर खड़ा कर देगी। 2029 आते-आते, यदि वर्तमान चेहरा फ्लॉप होता है, तो सत्ताधारी व्यवस्था तुरंत किसी नए मुखौटे को ‘मसीहा’ बनाकर पेश कर देगी, ताकि उनका खेल चलता रहे।
लेकिन, जब तक यह बदलाव होगा और जनता को इस राजनीतिक छलावे की सच्चाई पूरी तरह समझ में आएगी, तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। देश का एक बहुत बड़ा और अपूरणीय नुकसान हो चुका होगा। हमारी अर्थव्यवस्था, हमारा सामाजिक ताना-बाना और हमारी लोकतांत्रिक संस्थाएं इस हद तक खोखली कर दी जाएंगी कि उन्हें दोबारा खड़ा करने में दशकों लग जाएंगे।
क्या जागने का वक्त आ गया है?
‘ब्रांडवाणी समाचार’ के माध्यम से आज ‘कलम की धार’ सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि देश की अवाम के लिए एक झकझोरने वाली पुकार है। यह वक्त मुफ्त की रेवड़ियों पर ताली बजाने का नहीं, बल्कि तीखे सवाल पूछने का है। हमें यह समझना होगा कि जब तक हम जाति-धर्म के कृत्रिम विवादों में उलझे रहेंगे, तब तक अधिकारी और नेता हमारी पीढ़ियों का भविष्य बेचकर अपने लिए हजार एकड़ के महल खड़े करते रहेंगे।
वो लाड़ली बहनें अपने भविष्य को क्या इस तरह ही गरीबी दे कर जाएँगी जो उन्होंने झेला है? वो युवा कल के बुजुर्ग होंगे, और क्या वो आने वाली पीढ़ी को शिक्षा और रोजगार तक कभी पहुँचा पाएँगे? क्या हम सरकार के इस जाल से निकल पाएँगे या फिर भारतीय जनता पार्टी के चंद नेताओं और उन भ्रष्ट अधिकारियों के जाल में फँस के रह जाएँगे? देखना है क्या वो जवाब हम दे पाएँगे या फिर अगले चुनाव में इनके जाल का मोहरा बनके रह जाएँगे।
हमें इस 7.8% के कागजी विकास के बजाय, अपने घर, अपने बच्चों के रोजगार और अपने स्वाभिमान का हिसाब मांगना होगा। झूठ को प्रायोजित करने वाले इन चंद नेताओं और सत्ताधीशों के खिलाफ अब सच की आवाज बुलंद करनी ही होगी, वरना भविष्य हमें कभी माफ नहीं करेगा।
जय हिंद जय भारत….








