
भोपाल। मध्य प्रदेश को 2047 तक समृद्ध और विकसित राज्य बनाने की दिशा में राजधानी भोपाल में महत्वपूर्ण मंथन हुआ। “समृद्ध मध्य प्रदेश@2047 में केंद्रीय वित्त पोषित संस्थानों का योगदान” विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव में विभिन्न केंद्रीय संस्थानों ने प्रदेश के विकास को लेकर अपनी योजनाएं और सुझाव साझा किए। कार्यक्रम का आयोजन अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान (AIGGPA) ने किया।
‘वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस’ के जरिए विकास पर जोर
कॉन्क्लेव की थीम “वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस” रखी गई। इसका उद्देश्य केंद्रीय संस्थानों की विशेषज्ञता को मध्य प्रदेश की विकास प्राथमिकताओं से जोड़ना रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए रिसर्च, नवाचार, कौशल विकास, रोजगार, उद्योग और उद्यमिता पर एक साथ काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल गवर्नेंस और आधुनिक तकनीक को भी बढ़ावा देना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने “Skills are the new currency and innovation is the new economy” के जरिए भविष्य की अर्थव्यवस्था में कौशल और नवाचार की भूमिका को रेखांकित किया।
मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने युवाओं की खेती में घटती रुचि को चुनौती बताते हुए कृषि को आधुनिक तकनीक, सिंचाई और नए अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया।
केंद्रीय संस्थानों ने बताई अपनी भूमिका
कॉन्क्लेव में विभिन्न संस्थानों ने मध्य प्रदेश के विकास में अपनी संभावित भूमिका प्रस्तुत की। NITTR की ओर से सेमीकंडक्टर तकनीक के क्षेत्र में प्रदेश की संभावनाओं पर बात रखी गई। IIIT भोपाल ने साइबर सुरक्षा और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत बताई।
भारतीय सेना की ओर से ड्रोन तकनीक को आत्मनिर्भरता से जोड़ने पर जोर दिया गया। MANIT ने होमस्टे ट्रेनिंग से जुड़े कार्यों की जानकारी दी, जबकि LNIP ने फिजिकल एजुकेशन और खेल प्रशिक्षण के क्षेत्र में योगदान की बात रखी।
AMPRI ने युवाओं के वैज्ञानिक प्रशिक्षण और रोजगार क्षमता बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। संस्थान ने रायसेन जिले के जनकपुर गांव को CSR के तहत स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित करने की पहल भी बताई।
2047 के लक्ष्य के लिए संस्थानों और समाज की भागीदारी जरूरी
मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने कहा कि 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार के साथ समाज, उद्यमियों, संस्थानों और नागरिकों की भागीदारी जरूरी होगी। उन्होंने उत्पादक निवेश और मध्य प्रदेश को राष्ट्रीय वैल्यू चेन से जोड़ने पर जोर दिया।
कॉन्क्लेव में तकनीक, कौशल, रिसर्च, रोजगार, कृषि, विनिर्माण और नवाचार को प्रदेश के दीर्घकालीन विकास के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में सामने रखा गया। सरकार का लक्ष्य इन संस्थानों की विशेषज्ञता को जमीन पर लागू होने वाली योजनाओं से जोड़ना है।
समृद्ध मध्य प्रदेश@2047 का रोडमैप अब केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है। केंद्रीय संस्थानों, उद्योग, शिक्षा जगत और नागरिकों की भागीदारी को इसके अहम आधार के रूप में देखा जा रहा है।
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