
अनूपपुर: बरगवां-अमलाई नगर परिषद के नए भवन निर्माण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। करीब दो साल पहले भारी विरोध और विवाद के बाद ठंडे बस्ते में डाला गया यह मामला अब फिर से नगर की राजनीति में हलचल पैदा कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब तक भवन निर्माण के लिए कोई अंतिम स्थान तय नहीं हुआ, तब 28 मार्च को टेंडर जारी कैसे कर दिए गए। इसे लेकर नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है।
• जमीन तय नहीं, फिर भी टेंडर जारी
नगर परिषद के नए भवन के लिए अब तक कोई सर्वसम्मति नहीं बन पाई है। बावजूद इसके टेंडर जारी होने से यह मामला फिर विवादों में आ गया है।
• दो साल पहले भी हुआ था विरोध
करीब दो वर्ष पहले इस मुद्दे पर नगर में काफी विरोध और हंगामा हुआ था। तब नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की थी कि जनसहमति बनने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया जाए।
• भौगोलिक स्थिति को लेकर उठे सवाल
बरगवां-अमलाई नगर परिषद लगभग 7 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है, जिसमें देवहरा, सकोला, संजय नगर और अमलाई कॉलरी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। कई लोगों का कहना है कि भवन का निर्माण अमलाई क्षेत्र में किया जाना चाहिए, क्योंकि यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से बीच में पड़ता है और सभी वार्डों के लिए सुविधाजनक रहेगा।
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• पहले चिन्हित स्थान भी विवाद में
पहले वार्ड क्रमांक 4 डोंगरिया टोला में जगह चिन्हित की गई थी, लेकिन बाद में उसे “गोप एरिया” बताकर खारिज कर दिया गया। जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि वहां सड़क और अन्य व्यवस्थाएं पहले से मौजूद हैं।
• बैकडोर निर्णय की आशंका
कुछ लोगों का आरोप है कि पुराने पंचायत भवन (सोडा फैक्ट्री क्षेत्र) में ही नए भवन का निर्माण कराने की कोशिश की जा रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह क्षेत्र अभी भी बुनियादी सुविधाओं और बेहतर पहुंच मार्ग से वंचित है।
• पारदर्शिता की मांग
नगर के कई नागरिक, पत्रकार और बुद्धिजीवी मांग कर रहे हैं कि नगर परिषद भवन के निर्माण को लेकर पारदर्शिता बरती जाए और ऐसा स्थान तय किया जाए जो सभी वार्डों के लिए समान रूप से सुविधाजनक हो।
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