
वाराणसी, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के व्यवसायियों एवं पेशेवरों के लिए एक महत्वपूर्ण आयोजन, “एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026”, 31 मार्च 2026 को रामादा प्लाजा होटल, वाराणसी में आयोजित होने जा रहा है। इस सम्मेलन का मुख्य फोकस “एक जिला, एक उत्पाद” (ODOP) योजना, भौगोलिक संकेत (GI) टैगिंग और निर्यात के अवसरों पर केंद्रित रहेगा। आयोजन का उद्देश्य दोनों राज्यों के बीच आर्थिक सहयोग को सशक्त बनाना और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाना है।
इस सम्मेलन में मध्य प्रदेश के उद्योग मंत्री रमेश चंद सरकार मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। वे अपने संबोधन में कहेंगे, “ODOP योजना का उद्देश्य हमारे राज्यों के विशिष्ट उत्पादों को बढ़ावा देना है। GI टैगिंग से इन उत्पादों की गुणवत्ता और पहचान दोनों में वृद्धि होगी, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती मिलेगी।”
कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएं
सम्मेलन में विभिन्न सत्र आयोजित किए जाएंगे, जहां विशेषज्ञ ODOP और GI टैगिंग के महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे। हरियाणा के कृषि विशेषज्ञ डॉ. अंकित शर्मा इस विषय पर प्रकाश डालते हुए बताएंगे कि GI टैगिंग स्थानीय उत्पादों को विशिष्ट पहचान प्रदान करती है और उन्हें वैश्विक बाजार में अधिक मूल्यवान बनाती है।
उत्तर प्रदेश के उद्योग सचिव सुनील वर्मा इस अवसर पर जानकारी देंगे कि ODOP योजना के अंतर्गत अब तक 1,000 से अधिक उत्पादों को शामिल किया जा चुका है, जो राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। वे यह भी रेखांकित करेंगे कि यह योजना छोटे उद्योगों और कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक प्रभावी कदम है।
निर्यात अवसरों पर विशेष जोर
सम्मेलन में यह भी चर्चा होगी कि ODOP और GI टैगिंग से जुड़े उत्पादों के निर्यात को कैसे बढ़ाया जाए। विशेषज्ञ यह साझा करेंगे कि किस प्रकार दोनों राज्यों के व्यवसाय मिलकर वैश्विक बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत कर सकते हैं।
स्टार्ट-अप और उद्यमिता क्षेत्र की विशेषज्ञ साक्षी गुप्ता इस बात पर जोर देंगी कि उत्पाद की गुणवत्ता के साथ-साथ प्रभावी विपणन रणनीतियों को अपनाना भी अत्यंत आवश्यक है, ताकि भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में सफल हो सकें।
चुनौतियां और समाधान
हालांकि सम्मेलन में इन पहलों के लाभों पर चर्चा होगी, लेकिन साथ ही संभावित चुनौतियों पर भी विचार किया जाएगा। कई छोटे व्यवसायियों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, GI टैगिंग प्रक्रिया को सरल बनाने और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने पर भी चर्चा की जाएगी। आर्थिक सलाहकार राम प्रकाश इस विषय पर सुझाव देंगे कि छोटे उद्यमों को इस प्रक्रिया में शामिल करने के लिए विशेष सहायता तंत्र विकसित किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026 दोनों राज्यों के व्यवसायियों और पेशेवरों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा। ODOP और GI टैगिंग के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
यह सम्मेलन एक ऐसे नए दौर की शुरुआत का संकेत देता है, जहां स्थानीय उत्पाद न केवल अपनी पहचान बनाएंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्वीकृति प्राप्त करेंगे।








