
ग्वालियर: जिला अस्पताल मुरार में स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है. दो वर्षों से अस्पताल के एक कोने में धूल खा रही करीब 95 लाख रुपए की बेशकीमती लेप्रोस्कोप मशीन को आखिरकार चालू कर दिया गया है. मंगलवार को इस मशीन की मदद से पहली सफल सर्जरी की गई, जिससे अब जिले के गरीच और मध्यम वर्गीय मरीजों के लिए हाईटेक ऑपरेशन की राह आसान हो गई है. मुरार में शुरू हुई ‘दूरबीन सर्जरी’ मोतीझील निवासी 33 वर्षीय माधवी यादव एक साल से पेट र दर्द से परेशान थी। जांच में सामने आया कि उनकी पित्त की थैली (गाल ब्लैडर) में पथरी है। आमतौर पर इसके लिए बड़ा चीरा लगाना पड़ता था, लेकिन सर्जन डॉ. प्रणय दीक्षित ने लेप्रोस्कोपिक तकनीक से ऑपरेशन किया। माधवी की फिलहाल स्थिति सामान्य है।
इस ऑपरेशन को करने वाली टीम में सर्जन डॉ. सुशांत श्रीवास्तव, डॉ. सारांश दीक्षित, डॉ.प्रणय दीक्षित शामिल रहे। निश्चेतना विशेषज्ञ के रूप में डॉ. सुष्टि वर्मा व डॉ. नीलेश कुलश्रेष्ठ ने कमान संभाली। जिला अस्पताल में 95 लाख रुपए की यह मशीन लंबे समय से तकनीकी कारणों और रखरखाव के अभाव में बंद पड़ी थी। हाल ही में अस्पताल प्रबंधन ने इसे प्राथमिकता पर लेते हुए आवश्यक उपकरण और मेंटेनेंस की व्यवस्थाएं पूरी की। डॉ. दीक्षित ने बताया कि इस सुविधा के शुरू होने से अब मरीजों को निजी अस्पतालों में अब हजारों रुपए खर्च नहीं करने पड़ेंगे। दूरबीन पद्धति से न केवल समय की बचत होती है. बल्कि संक्रमण का खतरा भी न्यूनतम रहता है।
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