
राजधानी भोपाल में ब्यूरोक्रेट्स, उद्योगपतियों, व्यापारियों और रसूखदार लोगों के बीच खास पहचान रखने वाला अरेरा क्लब एक बार फिर चर्चा में है। खबर के अनुसार, क्लब की कार्यप्रणाली और सूचना साझा करने के तरीके पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बताया गया है कि क्लब आज भी आम लोगों के लिए एक “मायावी वर्ग” जैसा बना हुआ है, जहां पारदर्शिता की कमी साफ दिखाई देती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक आवेदक ने सूचना आयोग के पास आवेदन लगाकर क्लब से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी थीं। हालांकि क्लब की ओर से मांगी गई अधिकांश जानकारी देने से इनकार कर दिया गया। खबर में यह भी उल्लेख है कि जमीन और संपत्ति से जुड़ी जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे विवाद और गहरा गया है।
मामले की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि वर्ष 2010 में तत्कालीन सूचना आयुक्त ने क्लब को सूचना के अधिकार कानून के दायरे में मानते हुए लोक सूचना अधिकारी (PIO) नियुक्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद क्लब ने लंबे समय तक इस आदेश का पालन नहीं किया। यहां तक कि सूचना आयोग के निर्देश के बाद भी आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
सूत्रों के अनुसार, क्लब का संचालन और सदस्यता प्रक्रिया भी लगातार सवालों के घेरे में रही है। खबर में कहा गया है कि आमजन की पहुंच यहां तक सीमित है और यह जगह अब भी चुनिंदा प्रभावशाली लोगों के दायरे तक ही सीमित नजर आती है। यही वजह है कि पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
स्थानीय स्तर पर यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि क्लब को आवंटित जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ रही है। आने वाले दिनों में यदि इस पर कोई प्रशासनिक कार्रवाई या आयोग की ओर से नया आदेश आता है, तो मामला और तूल पकड़ सकता है।
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